सीहोर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, चन्द्रशेखर आज़ाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में आधुनिक संदर्भ में संस्कृत वाङ्मय की प्रासंगिकता विषय पर विचार गोष्ठी एवं अनुबंध प्रस्ताव का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक सस्वर वेदपाठ के साथ हुआ, जिसमें पुरुष सूक्त का विधिवत् वाचन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं गौतीर्थ सद्गुरु विद्यापीठ, बिजोरी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. इस अवसर पर संस्कृत भाषा, दर्शन, अध्यात्म एवं आधुनिक जीवन के परिप्रेक्ष्य में संस्कृत वाङ्मय की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया गया. इस दौरान प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस के संस्कृत विभाग एवं गौतीर्थ सद्गुरु विद्यापीठ के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों के सहयोग से संस्कृत भाषा एवं संस्कृत वाङ्मय के विकास, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार को सशक्त बनाना है. समझौते के अंतर्गत आधुनिकता एवं समकालीन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संस्कृत शिक्षा, शोध, संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान श्रृंखला तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोडऩे हेतु संयुक्त प्रयास किए जाएंगे, जिससे छात्रों एवं शोधार्थियों को अकादमिक एवं व्यावहारिक लाभ प्राप्त हो सके.
स्वागत भाषण में प्राचार्य ने कहा मैं कौन हूं, मेरा मूल स्वरूप क्या है, मेरा जन्म और मरण क्यों होता है तथा जीवन की विभिन्न अवस्थाओं का रहस्य क्या है इन सभी प्रश्नों के उत्तर संस्कृत वाङ्मय में निहित हैं. गोष्ठी को संबोधित करते हुए पं. नरेश तिवारी ने कहा आधुनिक भाषाएं हमें व्यवसाय सिखा सकती हैं, किंतु संस्कृत भाषा हमें व्यवहार और जीवन-मूल्य सिखाती है. उन्होंने कहा कि संस्कृत कंप्यूटर एवं तकनीकी जगत के लिए सर्वाधिक उपयोगी भाषा है तथा संस्कृत वाङ्मय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी समर्थन प्राप्त है.
विचार गोष्ठी व कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जितेन्द्र आर्य ने प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन डॉ. सिद्धनाथ खजुरिया द्वारा किया गया. कार्यक्रम के अंत में आचार्यों एवं ब्रह्मचारियों द्वारा वैदिक शांति पाठ का सस्वर वाचन किया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक शांति व सकारात्मक संकल्प के साथ हुआ.
