
इंदौर. जीआरपी पुलिस के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. जिसमें एनडीपीएस के मामलों में कार्रवाई कैसे की जाए इस पर फोकस किया गया. जिसमें कानूनी चूक से बचाव और दोषसिद्धि मजबूत करने के उद्देश्य को प्राथमिकता दी गई.
उक्त कार्यशाला रेल पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ला के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. प्रशिक्षण में समस्त थाना व चौकी प्रभारियों सहित अपराध शाखा के 21 अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया. इस दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के प्रावधान अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील होते हैं, जहां प्रक्रिया में मामूली चूक भी प्रकरण को न्यायालय में कमजोर कर सकती है. विशेष रूप से धारा 50 का विधिसम्मत पालन आरोपी के मौलिक अधिकारों से जुड़ा होने के कारण अनिवार्य है. कार्यक्रम में शासकीय अधिवक्ता अभिजीत राठौर और केंद्रीय जेल के सहायक निदेशक एवं विधि अधिकारी अकरम शेख ने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं को विस्तार से समझाया गया. इस दौरान तलाशी की विधि, मेमो तैयार करने की प्रक्रिया, पंच गवाहों की भूमिका, इलेक्ट्रॉनिक व तकनीकी साक्ष्यों का महत्व, न्यायालय की अपेक्षाएं और केस लॉ के माध्यम से विवेचना के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की. समूह चर्चा, केस स्टडी और प्रश्नोत्तर सत्र के जरिए विवेचकों की शंकाओं का समाधान भी किया. इस दौरान एसपी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जीआरपी अधिकारियों को कानून की बारीक समझ मिलती है, जिससे एनडीपीएस मामलों में मजबूत और न्यायालयीन कसौटी पर खरी विवेचना संभव हो सके.
