
ग्वालियर। कूनो नेशनल पार्क के चीतों को अब ग्वालियर के जंगल पसंद आ रहे हैं। चीतों को दूसरी पीढ़ी यानी तीन भारतीय चीते ग्वालियर के घाटीगांव क्षेत्र में 15 दिन से डटे हुए थे, जिनमें से एक चीता आज सुबह हाईवे पर एशलीन सड़क हादसे में जान गंवा बैठा। सिमरिया टांका निवासी पदम सिंह चौहान ने बताया कि बीते रोज गांव में तालाब के पास सुबह 7 बजे दो चीतों ने एक गाय के बछड़े का शिकार भी किया। फिर दिनभर वहीं आराम करते रहे। पांच दिन से इसी क्षेत्र में चीते घूम रहे थे। इससे ग्रामीण डर हुए हैं। एसडीओ वनमंडल मनोज जाटव का कहना है कि कूनो की एक्सपर्ट टीम और स्थानीय वन टीम लगातार बाकी दो चीतों की लोकेशन ट्रैक कर रही है।
वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि चीता केजीपी 3 और केजी 4 (चीता गामिनी और पवन के शावक) कूनो से निकलकर पहले जौरा फिर मुरैना पहुंचे। यहां के जंगलों से होते हुए ग्वालियर के सोनचिरैया अभयारण्य में दाखिल हुए। यहां बरई, पनिहार, आरोन और करई होते हुए सिमरिया पहुंचे। दोनों शावक इसी जंगल में थे। ये साथ शिकार करते हैं। वहीं तीसरा चीता (चीता आशा-पावक का शावक) शिवपुरी के जंगलों में घूमते हुए ग्वालियर वनमंडल क्षेत्र में पहुंच गया है। ये तीनों चीता शावक लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे।
