इटारसी। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इटारसी में बुधवार को संविधान दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजनीति विज्ञान विभाग, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, एनएसएस और एनसीसी के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
बाबा साहब को नमन और संकल्प
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के संरक्षक एवं मार्गदर्शक, प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण करके किया। डॉ. मेहता ने अपने उद्बोधन में भारतीय संविधान को भारत का अमर प्राण बताते हुए कहा, यह वह पावन तिथि है जब हम अपने संविधान को न केवल स्मरण करते हैं, बल्कि हृदय से नमन करते हैं। यह वह ग्रंथ है जिसने एक परतंत्र भारत को एक सूत्र में बांधकर विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना दिया है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को संविधान को जीवन में उतारने और अपने आचरण में लाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
संविधान : एक जीवंत नदी
राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष श्रीमती सुशीला वरवडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा संविधान कोई पत्थर की लकीर नहीं, बल्कि एक जीवंत नदी है। उन्होंने कहा कि इसमें गांधीजी का अहिंसा दर्शन, नेहरू जी की आधुनिकता की चमक, सरदार पटेल की एकता का दृढ़ संकल्प और डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय के अमिट हस्ताक्षर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना के शब्द हम भारत के लोग केवल लिखे नहीं गए हैं, बल्कि हर भारतीय के हृदय पर अंकित हैं, और आज का दिन आत्म-मंथन का अवसर है कि क्या हम वास्तव में संविधान के प्रति सच्चे हैं जिसने हमें समता का वरदान दिया है।
उद्देशिका का वाचन और रैली
कार्यक्रम के अंत में, प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने सभी को भारतीय संविधान की उद्देशिका का वाचन करवाकर संविधान दिवस की शपथ दिलाई। इसके बाद, उन्होंने हरी झंडी दिखाकर रैली का शुभारंभ किया। यह रैली महाविद्यालय से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्ग से गुजरी। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा मौलिक अधिकारों पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. दुर्गेश कुमार लसगरिया, डॉ. अमित दीक्षित और डॉ. असुंता कुजूर द्वारा तैयार की गई थी। इस आयोजन में महाविद्यालयीन स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
