चुनौतियों को अवसर में बदलने का भारत का रहा है लम्बा इतिहास: गोयल

नयी दिल्ली, 2 सितंबर (वार्ता) भारतीय सामानों पर पर अमेरिका में भारी शुल्क लगाये जाने से उत्पन्न चुनौतियों के बीच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत चुनौतियों को अवसर में बदलने को तैयार है।

श्री गोयल 21वें वार्षिक वैश्विक निवेशक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1991 में विदेशी भुगतान संकट, 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट और कोविड19 महामारी जैसे संकटों से उबरकर भारत मजबूती के साथ आगे बढता रहा। उन्होंने अमेरिका की व्यापार नीति की ओर संकेत करते हुए कहा, ‘ भारत एक बार फिर चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए तैयार है।’

उन्होंने विकसित भारत 2047 की यात्रा को साकार करने में सरकार और उद्योग जगत की सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया। श्री गोयल ने सरकार द्वारा निर्धारित बड़े लक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा, “हम यहां एक-एक पग बढ़ने नहीं हैं, हम लंबी छलांग लगाने के लिए हैं। आइए हम बड़े सपने देखें, बड़ी आकांक्षाएँ रखें और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करें।”श्री गोयल ने भारत के उल्लेखनीय आर्थिक प्रदर्शन, मज़बूत बुनियादी ढाँचे और विकसित भारत 2047 के प्रति राष्ट्र के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

उन्होंने भारत के विनिर्माण पीएमआई के 17.5 वर्षों के उच्चतम स्तर पर होने पर प्रकाश डाला और मेक इन इंडिया में अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने एक बल गुणक के रूप में बुनियादी ढाँचे की भूमिका पर ज़ोर दिया, जो उपभोग को बढ़ावा देता है और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

वाणिज्य मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए वैश्विक निवेशकों से कहा कि यह पिछले पाँच वर्षों में किसी भी तिमाही के लिए सबसे तेज़ वृद्धि है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि निजी पूंजीगत व्यय में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और हर महीने लाखों नए डीमैट खाते खोले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी बातें, बहुत लंबे समय में सबसे कम सीपीआई मुद्रास्फीति और महत्वपूर्ण घरेलू पूंजी प्रवाह भारत की विकास कहानी में नए सिरे से विश्वास को दर्शाते हैं।

 

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