नयी दिल्ली, (वार्ता) इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार आधार संख्या धारकों ने जून 2025 में 229.33 करोड़ सत्यापन लेनदेन किए जो यह इस वर्ष के पिछले महीने की तुलना के साथ-साथ पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने की तुलना में अधिक है।
मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार यह वृद्धि आधार के व्यापक उपयोग और उपयोगिता तथा देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को रेखांकित करती है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसके साथ ही इस तरह के लेन-देन की संचयी संख्या शुरूआत से अब तक 15,452 करोड़ से अधिक हो गई है। जून 2025 में प्रमाणीकरण लेनदेन जून 2024 में दर्ज किए गए ऐसे लेनदेन की तुलना में लगभग 7.8 प्रतिशत अधिक है।
सरकार का कहना है कि इस बढ़ते लेन-देन से पता चलता है कि कैसे आधार के माध्यम से किए जाने वाले प्रमाणीकरण प्रभावी कल्याणकारी वितरण और सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं का स्वेच्छा से लाभ उठाने के लिए एक सुविधा प्रदाता की भूमिका निभा रहा है। यह लाखों लोगों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ के मुख्य स्रोत के रुप में सामने है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई ) द्वारा इन हाउस विकसित कृत्रिम मेधा एवं मशीन लर्निंग (एआई और एमएल) आधारित आधार फेस ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशंस में भी लगातार वृद्धि देखी गई। जून 2025 में, 15.87 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष के इसी महीने में इस तरह के 4.61 करोड़ लेनदेन हुए थे। मंत्रालय का कहना है कि अब तक लगभग 175 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन किए जा चुके हैं। यह सत्यापन के इस तरीके को अपनाने की बढ़ती प्रक्रिया को इंगित करता है तथा आधार संख्या धारकों के लिए इसके लाभ को दर्शाता है।
सरकारी मंत्रालयों और विभागों, वित्तीय संस्थानों, तेल विपणन कंपनियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं सहित 100 से अधिक संस्थाएं लाभ तथा सेवाओं के सुचारू वितरण के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग कर रही हैं। जून में 39.47 करोड़ से अधिक ई-केवाईसी लेनदेन किए गए।
