वॉशिंगटन/सैन फ्रांसिस्को |दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क एक बार फिर अपने विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिर गए हैं। मस्क ने हाल ही में ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक डेटा साझा किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 1900 में दुनिया की 36% आबादी श्वेत थी, जो अब घटकर केवल 8% रह गई है। इस पोस्ट के साथ उन्होंने ‘श्वेत एकजुटता’ (White Solidarity) और ‘ग्रेट रिप्लेसमेंट’ जैसी थ्योरी को हवा दी है। आलोचकों का आरोप है कि मस्क डोनाल्ड ट्रंप के ‘MAGA’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) की आड़ में अब ‘WAGA’ (वाइट अमेरिका ग्रेट अगेन) की कट्टरपंथी विचारधारा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे अमेरिका और यूरोप में नस्लीय तनाव बढ़ सकता है।
भारतीय-अमेरिकी अरबपति और दिग्गज निवेशक विनोद खोसला ने मस्क के इस रुख की कड़ी निंदा की है। खोसला ने मस्क को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि वे नस्लवाद को एक ‘स्वीकार्य विचारधारा’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने टेस्ला, स्पेसएक्स और ‘X’ में काम करने वाले उन सभी गैर-श्वेत और नस्लवाद विरोधी कर्मचारियों से अपनी नौकरियां छोड़ने की अपील की है जो इस विचारधारा से सहमत नहीं हैं। खोसला ने सार्वजनिक रूप से इन कर्मचारियों को अपनी पोर्टफोलियो कंपनियों में नौकरी देने का प्रस्ताव भी दिया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मस्क पहले से ही अप्रवासी नीतियों और दक्षिणपंथी समूहों के प्रति अपने झुकाव के कारण कड़े विरोध का सामना कर रहे हैं।
मस्क की कंपनियों में भारतीयों की अहम भूमिका होने के बावजूद उनके हालिया बयानों ने टेक जगत में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। गौरतलब है कि टेस्ला के ऑटोपायलट इंजन के पीछे अशोक एल्लुस्वामी जैसे भारतीय इंजीनियर का दिमाग है और वैभव तनेजा कंपनी के सीएफओ (CFO) हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मस्क का यह ‘डेमोग्राफिक’ एजेंडा न केवल उनकी कंपनियों की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा सकता है, बल्कि अमेरिका के सिलिकॉन वैली में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर सकता है। फिलहाल, मस्क या उनकी कंपनियों की ओर से खोसला के बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर #WAGA और #BoycottTesla जैसे ट्रेंड्स ने जोर पकड़ लिया है।

