नयी दिल्ली 25 जून (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने लोकतंत्र को कुचला और आज वही लोग संविधान की किताबें जेब में लेकर घूमते हैं जबकि असल में उन्होंने ही संविधान का अपमान किया।
दिल्ली सरकार ने 25 जून 1975 को देश में लगे आपातकाल की 50वीं बरसी के अवसर पर ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में याद करते हुए कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस दौरान श्रीमती रेखा गुप्ता ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को अंग्रेजों से आज़ाद कराया, वैसे ही लोकतंत्र रक्षकों ने आपातकाल के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर भारत में लोकतंत्र को जीवित रखा।
मुख्यमंत्री ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार की नीतियों को क्रूर, तानाशाही और असंवेदनशील बताते हुए कहा कि 25 जून 1975 से शुरू हुआ यह दौर पूरे 21 महीने चला जिसमें लाखों लोगों को बिना कारण जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय न अपील थी, न दलील और न ही सुनवाई, यह भारत के लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने लोकतंत्र को कुचला और आज वही लोग संविधान की किताबें जेब में लेकर घूमते हैं जबकि असल में उन्होंने ही संविधान का अपमान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश में दोबारा आपातकाल जैसे काले दिन नहीं लौटेंगे और जनता ऐसे किसी भी तानाशाही प्रयास को सहन नहीं करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की लोकतांत्रिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज केंद्र और दिल्ली सरकार संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं का सम्मान करती हैं। मुख्यमंत्री ने 1975 के लोकतंत्र के सेनानियों के सम्मान में पूरे वर्ष कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की और सभी सेनानियों को भारत मां के सच्चे सपूत कहते हुए उनका अभिनंदन किया।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि इन अभिलेखों को देखने से पता लगता है कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई। रातों रात पूरे विपक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया, अदालतों को अपंग कर दिया गया, पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया और मीडिया संस्थानों पर ताले जड़ दिए गए।
