सिंधिया ने की सीतारमण से मुलाकात; दूरसंचार,डाक और पूर्वोत्तर क्षेत्र की दी जानकारी

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (वार्ता) केंद्र सरकार में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और दूरसंचार, डाक तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास विभागों की प्राथमिकताओं से उन्हें अवगत कराया।

श्री सिंधिया के पास संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय हैं। संचार मंत्रालय के तहत दूरसंचार और डाक विभाग आते हैं। बैठक के दौरान तीनों विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने वित्त मंत्री को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए तीनों विभागों की पूंजीगत व्यय की प्राथमिकताओं और मध्यावधि योजना (वित्त वर्ष 2029-30 तक) के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

दूरसंचार विभाग ने ‘आत्मनिर्भर 2025–2030 की राह’ के तहत बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) के आत्मनिर्भर बनने और वित्तीय सुधार के रोडमैप को प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि बीएसएनएल ने 17 साल बाद परिचालन लाभ हासिल किया है और हाल ही में स्वदेशी 4जी नेटवर्क की शुरुआत की गयी। कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है।

इसमें बताया गया कि भविष्य की निवेश प्राथमिकताओं में 4जी और 5जी नेटवर्क विस्तार, बुनियादी ढांचा और डिजिटल सिस्टम का आधुनिकीकरण, तथा भूमि के मौद्रीकरण पहलों को तेज करना शामिल है, ताकि दूरसंचार क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सुनिश्चित की जा सके। विभाग ने यह भी रेखांकित किया कि इन सुधारों का उद्देश्य इस दशक के अंत तक बीएसएनएल को लाभांश देने वाली, आत्मनिर्भर संस्था बनाना है।

डाक विभाग ने अपने आधुनिकीकरण और रूपांतरण का रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें डाक विभाग को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवा संगठन में बदलने पर जोर दिया गया। प्रमुख पहलों में स्वचालित पार्सल केंद्रों का निर्माण, 25 हजार डाकघरों और 1,600 कर्मचारी कॉलोनियों का आधुनिकीकरण, और डिजिटल भुगतान प्रणालियों का एकीकरण शामिल है।

विभाग ने संचालन दक्षता बढ़ाने, सेवा मानकों को सुधारने और अंतिम-छोर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचा और प्रक्रिया सुधारों पर भी जोर दिया। इन पहलों का उद्देश्य डाक विभाग को लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का अग्रणी संगठन बनाना है, जो देश की बढ़ती ई-कॉमर्स, निर्यात और वित्तीय समावेशन आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने श्रीमती सीतारमण के समक्ष 16वें वित्त आयोग के लिए अपनी पूंजीगत निवेश की प्राथमिकताओं और प्रस्तावित आवंटन को प्रस्तुत किया, जिसमें क्षेत्र के मजबूत परियोजना निष्पादन रिकॉर्ड और आवंटित कोष के इस्तेमाल की उच्च क्षमता को उजागर किया गया।

मंत्रालय ने नयी पहलों जैसे औद्योगिक विकास के लिए ‘उन्नति योजना’, बैंकरों के सम्मेलन से वित्तीय समावेशन के उपाय, और ‘ब्रांड नॉर्थईस्ट’ कार्यक्रम (जिसमें प्रत्येक राज्य के विशिष्ट उत्पाद और उद्योग ‘वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल के दृष्टिकोण के तहत प्रमोट किए जाते हैं) की रूपरेखा पेश की।

बैठक में परिणाम-आधारित शासन सुधार, डिजिटल निगरानी प्रणाली और समन्वित योजना पर विशेष जोर दिया गया, ताकि पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में उभर सके।

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