खटीमा/नैनीताल (वार्ता) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को खटीमा स्थित तराई बीज विकास निगम के मैदान में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा सूबेदार शेर सिंह धामी की पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और वीरंगनाओं को सम्मानित किया और वीर शहीदों और अपने पिता स्व0 सूबेदार शेर सिंह धामी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन जिस समर्पण और सेवा भावना के साथ हमारे शहीदों के परिजनों और वीरंगनाओं के लिये कार्य कर रही है वो निसंदेह प्रसंशनीय है। साथ ही उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन ने भी हमारे राज्य में सेवा और संवेदना की जो मिसाल प्रस्तुत की है वह भी अनुकरणीय है। इसके लिये इन दोनों संस्थाओं के सदस्यों को साधुवाद देता हूं।
उन्होंने कहा कि उनके पिताजी ने सेवानिवृत्ति के बाद क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार प्रचार हेतु एक प्राइमरी स्कूल की स्थापना की। जहां गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती थी। वे कहते थे कि देश सेवा सिर्फ वर्दी पहन कर ही नहीं होती बल्कि प्रत्येक क्षण अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना भी एक प्रकार की देश सेवा ही है। उन्होंने कहा कि पिताजी के इन्हीं शब्दों ने मुझे राजनीति में कदम रखने से पहले ही ये बात सिखा दी थी कि राजनीति कोई बड़ा पद पाने का माध्यम नहीं बल्कि जनभावनाओं को समझकर उनके दुख दर्द में सहभागी बनने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिये स्वयं को पूरी तरह से समर्पित कर देने का नाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं सेना में तो नहीं हूं पंरतु वीर सैनिकों को अपना आदर्श मानकर राष्ट्र सेवा में अपना यथासंभव योगदान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा हूं।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना को प्रत्येक क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने शहीदों और पूर्व सैनिकों के लिये अनेक कार्य किये हैं। उन्होंने सैन्य धाम जैसा एक धाम टनकपुर बनबसा खटीमा क्षेत्र में भी होने की वकालत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अनेक घोषणायें भी की। जिनमें पूर्व सैनिकों की वीरंगनाओं एवं पुत्रियों को ड्रोन दीदी के रूप में रोजगार परख प्रशिक्षण देने, 60 वर्ष से अधिक बुजुर्ग एवं पूर्व सैनिक एवं उनकी पत्नियों तथा पूर्व सैनिकों की वीरंगनाओं और वीर नारियों को निशुल्क बदरी धाम की यात्रा कराये जाने और परमवीर चक्र विजेताओं को डेढ़ करोड़ की सम्मान राशि देने, खटीमा में मोहम्मदपुर भुड़िया का नाम शहीद राणा वीरेन्द्र नगर के नाम से किया जाना आदि शामिल है।
