सीहोर। नगर स्थित प्रदेश का एकमात्र आवासीय खेलकूद संस्थान इन दिनों खुद अव्यवस्थाओं का अखाड़ा बन चुका है. जिस संस्थान से प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिलने थे, वहां आज बुनियादी सुविधाओं का अभाव खिलाडिय़ों के सपनों को कुचल रहा है. संस्थान में रहने वाले खिलाडिय़ों को न तो समुचित आवास मिल पा रहा है और न ही पौष्टिक भोजन.
प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए जिला मुख्यालय पर स्थापित प्रदेश का एकमात्र आवासीय खेलकूद संस्थान इन दिनों अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है. सुविधाओं के नाम पर करोड़ों के बजट वाले इस संस्थान में भविष्य के खिलाडिय़ों को न तो ढंग का खाना मिल रहा है और न ही पीने को साफ पानी. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहां की तुलना पिछले दिनों विवादों में रहे कोठरी स्थित वीआईटी कॉलेज से की जाने लगी है, जहां दूषित भोजन और पानी के चलते एक छात्रा की जान चली गई थी.
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन उसका ही एकमात्र आवासीय खेल संस्थान बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है.
प्रदेश भर से आए खिलाड़ी और उनके अभिभावक बार-बार अव्यवस्थाओं की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक न कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही सुधार की गंभीर पहल. सवाल यह है कि जब प्रदेश का इकलौता आवासीय खेलकूद संस्थान ही गंभीर अव्यवस्थाओं में डूबा रहेगा, तो प्रदेश से खेल प्रतिभाएं कैसे उभरेंगी? अब देखना यह है कि जिम्मेदार कब जागेंगे और खिलाडिय़ों के भविष्य को संवारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर यह संस्थान यूं ही सरकारी उदासीनता व प्रबंधन की लापरवाही की भेंट चढ़ता रहेगा.खेल मैदानों की स्थिति भी चिंताजनक है. कई खेलों के लिए आवश्यक उपकरण या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर बेहद घटिया हालत में हैं. प्रशिक्षकों की कमी और नियमित अभ्यास का अभाव खिलाडिय़ों की प्रतिभा को कुंठित कर रहा है. इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ फाइलों में योजनाएं दौड़ा रहे हैं. समय रहते अगर अव्यवस्था दूर नहीं हुई तो खेलकूद संस्थान बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा.
कच्ची रोटियां और पतली दाल खाने की लाचारी
प्रदेश के एकमात्र शासकीय आवासीय खेलकूद संस्थान में अध्ययनरत खिलाडिय़ों को मिलने वाली डाइट के नाम पर यहां केवल खानापूर्ति हो रही है. छात्र हेमंत परमार ने बताया कि मेस में रोटियां अक्सर कच्ची दी जाती हैं. मीनू के अनुसार पोषण युक्त भोजन नहीं मिलता. नियमों के मुताबिक ठंड की शुरुआत से ही डाइट में अंडे शामिल होने थे, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि इन्हें अब देना शुरू किया गया है. सूत्रों की मानें तो यहां अब तक भोजन का टेंडर ही नहीं हो सका है. पूर्व में जो ठेकेदार भोजन सप्लाई का काम करते थे, उनका लाखों रुपए अटका हुआ है. यहां सालों से टिके प्राचार्य और अन्य शिक्षकों द्वारा बरती जा रही भर्राशाही के चलते अगर प्रदेश का एकमात्र संस्थान बंद हो जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.
टंकी का पानी पीने को मजबूर खिलाड़ी छात्र
छात्रों की मानें तो संस्थान के छात्रावास के भीतर लगा वाटर कूलर सालों से शोपीस बना हुआ है. मजबूरी में छात्र सीधे छतों पर रखी टंकियों का पानी पी रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इन टंकियों की सालों से सफाई नहीं हुई है. इसी दूषित पानी का उपयोग मेस में खाना बनाने के लिए भी किया जा रहा है। मेस के भीतर चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है, जो संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहा है. सूत्रों की मानें तो संस्थान में जारी भर्राशाही की अगर निष्पक्षता से जांच हो जाए तो कई रहस्योद्घाटन सामने आ सकते हैं तो लाखों रुपए की बंदरबांट की कहानी स्कूल प्रबंधन की कलई खोल सकती है.
दूषित पानी के सेवन से छात्र को हुआ था पीलिया
आवासीय खेलकूद संस्थान प्रबंधन की लापरवाही का सबसे बड़ा शिकार 9वीं का छात्र योगेंद्र यादव हुआ. दूषित पानी पीने की वजह से योगेंद्र को पीलिया हो गया.हालत इतनी बिगड़ी कि उसे इलाज के लिए अपने घर जाना पड़ा, जहां वह 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। हाल ही में स्वस्थ होकर लौटे योगेंद्र की आपबीती यहां के अन्य छात्रों के डर को और बढ़ा रही है. अन्य छात्रों का भयभीत होना जरूरी भी है, क्योंकि यहां मेस में मिलने वाला भोजन मेन्यू के अनुसार नहीं है तो साफ पानी के अभाव में उन्हें उन टंकियों का पानी पीना पड़ रहा है जो कई महीनों से साफ ही नहीं हो सकी हैं. इतना ही नहीं कई कमरों में साफ-सफाई का अभाव है, स्कूल व छात्रावास के सभी शौचालय बदहाल हैं.
सुधार के निर्देश दिए जाएंगे
आवासीय खेलकूद संस्थान के छात्रावास की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर जल्द ही सुधार के निर्देश दिए जाएंगे ताकि छात्रों को कोई असुविधा न हो.
आलोक शर्मा,
प्राचार्य, आवासीय संस्थान
