मुंबई, 23 मई (वार्ता) फिल्म पेड्डी में दर्शकों को राम चरण का सबसे अलग रूप देखने को मिलेगा। अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारे अब ऐसे किरदार निभा रहे हैं जो पूरी तरह अच्छे इंसान नहीं होते। कोई तस्कर होता है, कोई गैंगस्टर, कोई विद्रोही या हिंसक आदमी। उनकी पहचान अच्छाई से नहीं, बल्कि डर और दबदबे से बनती है। हीरो की छवि अब ज्यादा अंधेरी, ठंडी और आम लोगों से दूर हो गई है। गुस्सा तो होता है, लेकिन वह ज्यादातर निजी बदले, ताकत या सत्ता के लिए होता है।लेकिन पेड्डी इस रास्ते से बिल्कुल अलग जाती हुई दिखाई दे रही है। बुची बाबु की आने वाली फिल्म पेड्डी को देखकर ऐसा लगता है कि राम चरण कोई एंटी-हीरो नहीं निभा रहे हैं, बल्कि ऐसा हीरो निभा रहे हैं जिसे भारतीय व्यावसायिक सिनेमा धीरे-धीरे खोता जा रहा था ऐसा हीरो जिसका गुस्सा सिर्फ उसका अपना नहीं, बल्कि उसके आसपास के लोगों का भी गुस्सा हो।हाल ही में जारी किए गए ट्रेलर में पेड्डी को किसी अपराधी साम्राज्य खड़ा करने वाले इंसान या किसी अजेय मशीन की तरह नहीं दिखाया गया है। उसे गांव के लोगों की तकलीफों और गुस्से से निकला हुआ आदमी दिखाया गया है, जो अपनी मिट्टी और अपने इलाके की पहचान के लिए खड़ा है।
फिल्म में दिखाए गए खेल केवल मनोरंजन जैसे नहीं लगते। क्रिकेट, कुश्ती और दौड़ यहां लड़ाई के मैदान जैसे महसूस होते हैं। ट्रेलर में भीड़ की प्रतिक्रियाएं ऐसी लगती हैं जैसे वर्षों से दबा हुआ गुस्सा फूटकर बाहर आ रहा हो। लोग जोर-जोर से चिल्लाते हैं, खिलाड़ी मिट्टी में गिरते हैं और पूरा माहौल बहुत निजी और वास्तविक महसूस होता है। राम चरण ने पहले भी कई तीव्र और दमदार किरदार निभाए हैं। मगधीरा, ध्रुवा और आरआरआर जैसी फिल्मों में उनके किरदार बड़े और भव्य थे। लेकिन पेड्डी अलग दिखाई देती है। यहां उनका हाव-भाव ज्यादा भारी, खुरदरा और जमीन से जुड़ा हुआ लगता है। वह किसी सुपरस्टार की तरह नहीं, बल्कि ऐसे आदमी की तरह दिखाई देते हैं जिसके अंदर वर्षों का गुस्सा भरा हुआ है।
यह बात सीधे निर्देशक बुच्ची बाबू सना की सोच से जुड़ती है। उनकी फिल्म सामाजिक ऊंच-नीच पर आधारित थी। अब पेड्डी में वह इन्हीं बातों को और बड़े स्तर पर दिखाते हुए नजर आ रहे हैं, जहां खेल, पुरुषत्व, समुदाय, गांव की राजनीति और पहचान सब एक साथ जुड़े हुए हैं। फिल्म से जुड़ी खबरों के अनुसार इसकी कहानी एक दिहाड़ी मजदूर की जिंदगी से प्रेरित है, जिससे यह कहानी कल्पनात्मक हीरोवाद की बजाय मेहनतकश लोगों की सच्चाई से जुड़ी हुई लगती है। आज की कई मसाला फिल्मों में हीरो आम लोगों से ऊपर दिखाई देते हैं। लेकिन पेड्डी में राम चरण लोगों के बीच खड़े नजर आते हैं। ट्रेलर में वह भीड़ के अंदर दिखाई देते हैं, उससे अलग नहीं। वह घायल होते हैं, संघर्ष करते हैं, दौड़ते हैं, कुश्ती लड़ते हैं और अपने आसपास के शोर-शराबे और अफरा-तफरी में खो जाते हैं।इसी वजह से यह एक अलग तरह का जनप्रिय हीरो बनता हुआ दिखाई देता है।
वह ऐसा गैंगस्टर नहीं है जिससे लोग डरें। वह ऐसा विद्रोही भी नहीं है जिसे लोग दूर से देखकर केवल प्रशंसा करें।बल्कि वह ऐसा आदमी लगता है जो अपने पीछे खड़ी भीड़ के गुस्से की आवाज बन जाता है।
शायद यही कारण है कि रिलीज से पहले ही पेड्डी को लेकर लोगों की भावनाएं इतनी मजबूत दिखाई दे रही हैं। दर्शकों को लग रहा है कि राम चरण आखिरकार ऐसा हीरो निभा रहे हैं जो अपनी मिट्टी से जुड़ा हुआ है ऐसा इंसान जिसका गुस्सा तब बाहर आता है जब आम लोगों पर बहुत ज्यादा अन्याय होने लगता है और आज के समय में, जब फिल्मों में कई बार विलेन जैसे किरदारों को हीरो बनाकर दिखाया जा रहा है, ऐसे में असली हीरो वाली भावना की वापसी लोगों को फिर से ताज़गी भरी और नई महसूस हो रही है।

