इंदौर: 21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा में रविवार को प्रथमेश पवार लिखित और पंकज वागले निर्देशित नाटक ‘रेशन कार्ड’ की बेहतरीन प्रस्तुति दी गई. संस्था नटरंग उत्सव द्वारा मंचित नाटक एक साधारण से घरेलू प्रसंग के बहाने परिवार के भीतर लगातार बढ़ती भावनात्मक दूरियों, संवादहीनता और रिश्तों में छिपी संवेदनाओं को बेहद प्रभावी ढंग से सामने लाता है.मुंबई की एक चाल में रहने वाले सुभाष परब, उनकी पत्नी सुनंदा, बेटे अभि, बेटी दीदी और गांव से मुंबई लाई गई दादी के माध्यम से नाटक आज के उस परिवार की तस्वीर खींचता है, जिसमें लोग एक ही छत के नीचे रहते तो हैं, लेकिन मन से एक-दूसरे से बहुत दूर होते जा रहे हैं.
नाटक की सबसे बड़ी खूबी इसका सहज और स्वाभाविक कथानक है. राशन कार्ड जैसी मामूली लगने वाली वस्तु को लेखक प्रथमेश पवार ने कहानी का केंद्रीय सूत्र बनाकर रिश्तों की कई परतें खोल दी हैं. अभि को विदेश में नौकरी का अवसर मिलता है और आवश्यक दस्तावेज के रूप में राशन कार्ड की तलाश शुरू होती है. राशन कार्ड नहीं मिलता तो घर में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है. लेकिन जब यह सच सामने आता है कि राशन कार्ड सुनंदा ने ही छिपाया है, तब दर्शक के सामने केवल एक रहस्य नहीं खुलता, बल्कि एक मां के मन की वह पीड़ा सामने आती है, जिसे परिवार ने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की.
प्रथमेश पवार की लेखनी की विशेषता यह है कि उन्होंने किसी पात्र को खलनायक नहीं बनाया. हर व्यक्ति अपने भीतर एक संघर्ष लेकर चलता है. यही मानवीय दृष्टि नाटक को भावनात्मक गहराई देती है. दिग्दर्शक पंकज वागले ने लेखक की संवेदना को मंच पर प्रभावशाली रूप दिया है. सुभाष, सुनंदा, अभि, दीदी और दादी की भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों की मानसिकता को विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत किया है.
‘रेशन कार्ड’ दरअसल,राशन कार्ड खोजने की कहानी नहीं, बल्कि उन रिश्तों को खोजने की कहानी है, जो साथ रहते-रहते कहीं खो गए हैं. नाटक दर्शकों से एक सरल लेकिन गहरा सवाल पूछता है कि क्या हम अपने सबसे करीबी लोगों को वास्तव में समझते हैं?
कलाकार …
डॉ. पियुष केंदुरकर, अमोल श्रीखंडे, अपर्णा सानप, सीमा गर्गे, स्वप्निल राखे, श्री भागवत, दिलीप नजाण, खुशी भागवत, भावना कोतवाल, अरूण गोखले, देवांश बोरगांवकर, श्रीमती मनिषा सुपेकर, सपना धरले, मयुरी धरपळे
