समृद्ध किसान का नारा

मध्य प्रदेश का 71वां स्थापना दिवस ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ की थीम पर मनाने का निर्णय केवल एक आयोजन का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और भविष्य की दिशा से जोडक़र देखने की जरूरत है. राजनीति में नारों और थीम का अपना महत्व है. वे सरकार की प्राथमिकताएं जनता तक पहुंचाने और किसी बड़े लक्ष्य के लिए माहौल बनाने का माध्यम बनते हैं. लेकिन नारा तभी सार्थक होता है, जब उसके पीछे लगातार काम, स्पष्ट नीति और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम हों.मध्य प्रदेश में कृषि का महत्व किसी आंकड़े भर तक सीमित नहीं है. प्रदेश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. ऐसे में किसान की समृद्धि का अर्थ केवल किसान की आय बढऩा नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होना, कृषि आधारित उद्योगों को गति मिलना, रोजगार के अवसर बढऩा और प्रदेश की समग्र अर्थव्यवस्था का विस्तार होना है. इसलिए ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ की थीम को एक वर्ष के उत्सव तक सीमित रखना इसके उद्देश्य को छोटा कर देगा.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्नत कृषि, प्राकृतिक खेती और कृषि में नवाचार की प्रदर्शनी लगाने तथा उपलब्धि हासिल करने वाले किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सम्मानित करने का निर्णय स्वागत योग्य है. किसान कल्याण वर्ष के दौरान हुई गतिविधियों को स्थापना दिवस पर सामने लाने से प्रदेश में कृषि क्षेत्र में हो रहे प्रयोगों और उपलब्धियों को व्यापक पहचान मिल सकती है. लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होगी.सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक की पहुंच बढ़े. सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, फसल बीमा, बाजार, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था मजबूत हो. प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचार को केवल प्रदर्शनी का विषय बनाने के बजाय उन्हें किसानों की आर्थिक व्यवहार्यता से जोडऩा होगा. खेती से जुड़ी लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार मूल्य की अस्थिरता ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान निरंतर सरकारी हस्तक्षेप और बेहतर संस्थागत व्यवस्था से ही संभव है.स्थापना दिवस पर सरकारी भवनों की रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव का वातावरण बनाएंगे, लेकिन प्रदेश की वास्तविक चमक तब बढ़ेगी, जब किसान के खेत में उत्पादन के साथ उसकी आय भी बढ़े. स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात तभी प्रभावी होगी, जब उन्हें बाजार, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंचाने की व्यवस्था बने.

राजनीतिक घोषणाएं सरकारों के लिए दिशा तय करती हैं, लेकिन शासन की विश्वसनीयता घोषणाओं से नहीं, उनके परिणामों से बनती है. ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ का एजेंडा एक बहुत अच्छी पहल है , यदि इसे मध्य प्रदेश की दीर्घकालिक विकास नीति का आधार बनाया जाता है तो स्थापना दिवस का यह संकल्प एक अवसर बन सकता है. सरकार को इस थीम को अगले वर्ष तक नहीं, बल्कि लगातार कई वर्षों तक चलने वाले ठोस कार्यक्रम में बदलना होगा. क्योंकि मध्य प्रदेश की समृद्धि का रास्ता दरअसल,खेत से होकर ही जाता है.

 

 

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