अनुमति के फेर में फंसे झूले, फीका पड़ा मेला

सीहोर। दस दिवसीय गणेशोत्सव के साथ नगर के प्राचीन श्रीगणेश मंदिर परिसर में हर साल की तरह मेला शुरू हो गया है, लेकिन इस बार मेले में बच्चों और परिवारों के मनोरंजन का प्रमुख आकर्षण झूले नजर नहीं आ रहे हैं. प्रशासन द्वारा झूला संचालकों को अनुमति नहीं दिए जाने से जहां संचालकों में मायूसी है, वहीं मेले में आने वाले लोगों को भी बिना झूलों के मेला फीका लग रहा है. खास बात यह है कि मेला शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन झूला संचालक अब भी अनुमति मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

नगर के प्राचीन श्रीगणेश मंदिर परिसर में गणेशोत्सव के अवसर पर लगने वाला पारंपरिक मेला इस बार भी शुरू हो गया है. दस दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. मेले में दुकानें सज गई हैं और चहल-पहल भी दिखाई देने लगी है, लेकिन हर साल बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले बड़े-बड़े झूले इस बार अब तक शुरू नहीं हो सके हैं.

झूला संचालकों का कहना है कि वे मेले की तैयारियों को लेकर दूर-दराज के शहरों से अपने भारी-भरकम झूले ट्रकों में लादकर यहां लेकर पहुंचे हैं. झूलों को मंदिर परिसर में लाने, ट्रांसपोर्ट का भाड़ा देने और उन्हें निर्धारित स्थान पर फिट करने में हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण झूले खड़े हैं और संचालक इंतजार कर रहे हैं.

संचालकों का कहना है कि यदि प्रशासन को झूलों के संचालन की अनुमति नहीं देनी थी तो इसकी जानकारी पहले ही दे दी जाती. इससे वे झूले लाने और उन्हें लगाने में होने वाले खर्च से बच सकते थे. अब मेला शुरू होने के बाद अनुमति नहीं मिलने से उनका पैसा भी फंस गया है और रोजाना होने वाले संभावित कारोबार का नुकसान अलग है.

इस मामले में जब हमारे द्वारा अनुविभागीय अधिकारी तन्मय वर्मा से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि गणेश मंदिर परिसर में लगाए गए झूलों की अनुमति मैं नहीं देता हूं, वहीं सीएसपी डाक्टर अभिनंदना शर्मा का कहना है कि हमसे सिर्फ अभिमत मांगा जाता है जो थाने से एसडीएम कार्यालय पहुंचाया जा चुका है उसके आधार पर एसडीएम अपने विवेक अनुसार अनुमति देते हैं. ऐसे में प्रशासनिक हीला- हवाली ने गरीब झूला संचालकों की कमर ही तोड़ दी है. वह अब अपना सामान समेटने की तैयारी में हैं.

झूला संचालक ही नहीं बच्चों में भी मायूसी

इधर, मेले में पहुंच रहे लोगों का कहना है कि गणेशोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में लगने वाला मेला बच्चों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहता है. बड़े झूले, बच्चों के मनोरंजन के साधन और खान-पान की दुकानों के कारण मेले में पूरे परिवार के साथ लोग पहुंचते हैं. इस बार झूले नहीं होने से मेले की रौनक पहले जैसी नजर नहीं आ रही है. बच्चों में भी मायूसी नजर आ रही है. मेला शुरू होने के चौथे दिन भी झूला संचालक अनुमति की आस लगाए बैठे हैं. अब सभी की निगाह प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी है. यदि अनुमति मिलती है तो झूले शुरू होने के बाद मेले की रौनक लौट सकती है, वहीं अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में संचालकों के सामने आर्थिक नुकसान का संकट और गहरा सकता है.

 

 

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