शोभापुर। 2 अक्टूबर की तरह नशा मुक्ति अभियान भी अब प्रतीकात्मक बनता जा रहा है। जहां एक ओर शासन मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर शोभापुर से लेकर सेमरी हरचंद तक गांजा, अफीम, शराब, स्मैक जैसी चीजों का खुलेआम व्यापार फल-फूल रहा है। मुख्य बाजारों और ढाबों पर नशे की पुड़िया आसानी से उपलब्ध है। गांवों में कुछ घर तो वर्षों से इस अवैध व्यापार के केंद्र बने हुए हैं, जिसकी जानकारी सबको है, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं होती। सूत्र बताते हैं कि ढाबों और पान दुकानों पर मदिरा खुलेआम बेची जा रही है, और यह सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। संबंधित विभाग के कुछ कर्मचारी इन व्यापारियों से मिलीभगत में नजर आते हैं। वहीं, युवा वर्ग इन जगहों पर पार्टी करते और नशा करते देखा जा सकता है। यदि प्रशासन नियमित जांच करे, तो नशे की इस बढ़ती लत को रोका जा सकता है। लेकिन सवाल वही है,क्या प्रशासन कुछ करेगा या ‘नशा मुक्ति अभियान’ सिर्फ एक औपचारिकता रह जाएगी?
शोभापुर और आसपास मादक पदार्थों की खुली बिक्री पर सवाल
