चेन्नई, (वार्ता) गगनयान मिशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एलवीएम3 रॉकेट के ऊपरी तीसरे चरण के क्रायोजेनिक इंजन का फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया है।
यह जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को दी। संगठन ने कहा किउसने एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के सातवें परिचालन मिशन (एलवीएम-एम7) के लिए निर्धारित क्रायोजेनिक इंजन का फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है।
यह परीक्षण कल तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) की मेन इंजन एंड स्टेज टेस्ट फैसिलिटी (एमईटी) में किया गया।
इसरो ने बताया कि हर मिशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले क्रायोजेनिक इंजन को उड़ान के लिए स्वीकृति देने की प्रक्रिया के तहत हॉट टेस्ट से गुजरना पड़ता है। ऊपरी चरण के इस इंजन की समुद्र तल की परिस्थितियों में हॉट टेस्टिंग करने के लिए, जबकि इसका नोजल अधिक ऊंचाई पर संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, पहले नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम (एनपीएस) विकसित और मान्य किया गया था। इसके लिए कई क्वालिफिकेशन परीक्षण किए गए थे।
एनपीएस ने क्रायोजेनिक इंजनों के फ्लाइट एक्सेप्टेंस परीक्षण से जुड़े समय और प्रयास को कम किया है। यह हाई एल्टीट्यूड टेस्ट फैसिलिटी में उड़ान के अनुरूप वैक्यूम परिस्थितियों का अनुकरण करता है।
एलवीएम3 रॉकेट की पेलोड क्षमता बढ़ाने के लिए भविष्य के एलवीएम3 मिशनों में सी32 चरण के सीई20 इंजन को बढ़ाए गए 22 टन के थ्रस्ट स्तर पर संचालित करने की योजना है। इसे ध्यान में रखते हुए यह फ्लाइट एक्सेप्टेंस टेस्ट 22 टन के थ्रस्ट स्तर पर किया गया। सीई20 इंजन के प्रदर्शन ने परीक्षण के सभी उद्देश्यों को पूरा किया और इससे इंजन प्रणालियों के संतोषजनक प्रदर्शन की पुष्टि हुई।
इस परीक्षण के दौरान गगनयान के लिए सी32 चरणों में इस्तेमाल किए जाने वाले एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (एलटीपीएम) का भी सफल प्रदर्शन किया गया।
इसरो ने बताया कि इंजन की मरम्मत और पुनः तैयारी के बाद इसे एलवीएम3 एम7 मिशन के सी32 फ्लाइट स्टेज में लगाया जाएगा। यह मिशन 2026 की चौथी तिमाही के दौरान निर्धारित है।
