जबलपुर: जबलपुर स्थित ऐतिहासिक टेलीकॉम फैक्ट्री की भूमि एवं उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना का उपयोग शहर के औद्योगिक एवं तकनीकी विकास के लिए किया जाना चाहिए। इसे केवल भूमि अथवा परिसंपत्ति के रूप में देखने के बजाय आधुनिक टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए।
ये बातें
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहीं हैं।
टेलीकॉम फैक्ट्री को आधुनिक टेलीकॉम क्लस्टर बनाने से यहां 5 जी/6 जी नेटवर्क से संबंधित उपकरण, नेटवर्किंग इक्विपमेंट, राउटर, स्विच, ट्रांसमिशन उपकरण एवं अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर का निर्माण किया जा सकता है। इससे ऑप्टिकल फाइबर केबल, फाइबर टर्मिनेशन एवं नेटवर्किंग उपकरणों का निर्माण तथा परीक्षण भी संभव हो सकेगा।
सरकार से किया आग्रह
फेडरेशन ने केंद्रीय संचार मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा मध्यप्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि टेलीकॉम फैक्ट्री की वर्तमान स्थिति, भूमि एवं भवनों का तकनीकी एवं व्यावसायिक अध्ययन कराकर एक विस्तृत डीपीआर तैयार की जाए और निजी क्षेत्र की भागीदारी से यहां नए उद्योग एवं प्रोजेक्ट लाने की कार्ययोजना बनाई जाए।
कुछ इस तरह मिल सकता है लाभ
जबलपुर स्थित टेलीकॉम फैक्ट्री की भूमि में आधुनिक टेलीकॉम क्लस्टर बनने से तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित नेटवर्क तथा स्मार्ट कम्युनिकेशन सिस्टम पर अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित किया जा सकता है। रक्षा संसाधन जबलपुर की रक्षा उत्पादन से जुड़ी मजबूत औद्योगिक पृष्ठभूमि को देखते हुए डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, सर्विलांस उपकरणों के निर्माण की दिशा में उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। साथ ही जबलपुर के युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट लैब और टेक्नोलॉजी एक्सीलेटर स्थापित किए जा सकते हैं। वहीं फेडरेशन के कार्यसमिति सदस्य आशीष सक्सेना, कमल ग्रोवर, बलदीप मैनी, अरुण पवार, अशोक कपूर आदि ने कहा कि जबलपुर में पहले से ही टेलीकॉम क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है तथा ऐसे में बंद पड़ी टेलीकॉम फैक्ट्री को इस पूरे इकोसिस्टम का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सकता है।
