नयी दिल्ली, 08 मार्च (वार्ता) सरकार ने स्टॉक में सुधार को देखते हुए करीब ढाई साल बाद देश से टूटे चावल के निर्यात पर पाबंदी उठा ली है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा शुक्रवार रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार शत-प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात को प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में रख दिया गया है और इससे इसका स्टॉक कम करने में मदद मिलेगी।
भारत ने सितंबर 2022 में शत-प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था और उसके बाद बारिश की अनिश्चितताओं के बीच धान उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने के पश्चात 2023 में अन्य सभी ग्रेड के चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन धान की फसल अच्छी होने और चावल के रिकॉर्ड उत्पाद से आपूर्ति की चिंता दूर होने पर टूटे चावल को छोड़कर अन्य ग्रेड चावल के निर्यात की पाबंदी हटा ली गयी थी।
चावल निर्यातकों का कहना है कि इस समय देश में टूटे चावल का स्टॉक सरकार के लक्ष्य से काफी अधिक है और इस निर्णय से स्टॉक को कम करने में मदद मिल सकती है। निर्यातकों को उम्मीद है कि पाबंदी हटाने के निर्णय के बाद भारत से अफ्रीकी और दक्षिण पूर्व एशियाई बाजारों में इस वर्ष 20 लाख टन टूटे चावल का निर्यात हो सकता है।
टूटे चावल का इस्तेमाल कम आय के लोगों के लिए आहार के साथ साथ पशु आहार और एथनाल के उत्पादन में भी होता है।
