सतना: पारंपरिक खेती के घटते मुनाफे और बढ़ती बेरोजगारी के दौर में जिले के युवा किसान रंजीत ने कैक्टस प्रजाति के पेड़ से पैदा होने वाले ड्रेगन फ्रूट की खेती का लक्ष्य तय किया है. उचेहरा क्षेत्र के भर्री गांव के पढ़े-लिखे युवा किसान रंजीत कुशवाहा ने लीक से हटकर नई राह चुनी है। एमएससी ड्रॉपआउट और बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक उत्तीर्ण होने के बाद रंजीत ने पारंपरिक फसलों का मोह छोड़कर रेगिस्तानी पौधे (कैक्टस प्रजाति) ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती शुरू की है। इंटरनेट की मदद से इसकी बारीकियां सीखी .इस आधुनिक तकनीक के सहारे अब वे न केवल खुद के लिए बेहतर मुनाफा कमाने की सम्भावना पैदा कर चुके हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन गए हैं।
नवभारत ने जिले में हो रही इस प्रकार की व्यवसायिक खेती की पड़ताल जब रंजीत के खेत पर जाकर की तो वहाँ का दृश्य ही अलग था. बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई के दौरान ही कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने का मन बना रंजीत ने बताया नौकरी की पुरानी परिपाटी को छोड़ उन्होंने नए विकल्पों की तलाश शुरू की, तो इंटरनेट पर उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी मिली। उन्होंने बिना सोचे-समझे बड़ा जोखिम लेने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने पहले केवल 4 से 5 पौधे लगाकर अपने खेत की मिट्टी और जलवायु में इसका ट्रायल किया। जब ट्रायल पूरी तरह सफल रहा और पौधे बेहतर तरीके से बढ़ने लगे, तब उसके बाद बड़े पैमाने पर खेती करने का फैसला किया.रंजीत ने बाजार की मांग और बेहतर पैदावार को देखते हुए ड्रैगन फ्रूट की ‘रेड जंबो’ किस्म को चुना, जिसके एक फल का वजन ही 500 से 800 ग्राम तक होता है।
उन्होंने मार्च 2025 में आधा एकड़ जमीन पर 60 रुपया प्रति पौधे की दर से कुल 2200 पौधे खरीदे, जिस पर शुरुआती तौर पर ₹1,20,000 की लागत आई। खेत की मेड़बंदी, पोल संरचना और पौधों की खरीद मिलाकर अब तक वे इस खेती में लगभग 3 से 4 लाख का कुल निवेश कर चुके हैं।
ड्रैगन फ्रूट की बेहतर वृद्धि के लिए रंजीत ने विशेष संरचनात्मक तरीके से खेत तैयार किया। उन्होंने मिट्टी में गोबर की खाद और बालू का सही मिश्रण मिलाया ताकि जल निकासी बेहतर रहे और जड़ों का फैलाव तेजी से हो सके। इसके बाद खेत में मेड़ बनाकर 10-10 फीट की दूरी पर कंक्रीट के खंभे (पोल) लगाए गए। खेत की जगह का कुशल उपयोग करते हुए उन्होंने प्रत्येक खंभे के सहारे 4 पौधे और बीच में 2-2 फीट की दूरी पर 1 से 2 पौधे रोपे।
6 महीने का उत्पादन चक्र, जून से शुरू होती है फसल
यह फसल साल में लगभग 6 महीने फल देती है। जून के महीने से पौधों में फूल आना शुरू हो जाते हैं। फूल आने के बाद उसे परिपक्व फल बनने में लगभग 60 दिन (2 महीने) का समय लगता है। आधा एकड़ में तैयार यह खेत अब आने वाले सालों में रंजीत को लंबे समय तक बेहतर मुनाफा देगा, क्योंकि ड्रैगन फ्रूट का एक बार लगाया गया पौधा 20 से 25 सालों तक फल देता रहता है। रंजीत कुशवाहा का यह प्रयास साबित करता है कि अगर सही तकनीक, जानकारी और इच्छाशक्ति हो, तो कृषि के क्षेत्र में भी एक शानदार करियर बनाया जा
सकता है।
फल का उत्पादन और बिक्री
एक पौधे से लगभग 6 महीने में 16 से 24 किलोग्राम तक ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और मांग के अनुसार करीब 40 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है।
सोच बदलने की जरूरत: रंजीत
रंजीत कुशवाहा ने बताया कि किसानों को सोच बदलने की जरूरत है पारंपरिक खेती को कम से कम करके सब्जी और फल खेती करने के लिए जाए। जिससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा होगा।
