इन्दौर: युवाओं की भावनाओं को समझना और उनके मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होना समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है. माता-पिता, शिक्षक, समाज और शासन सभी को मिलकर युवाओं की अपेक्षाओं, समस्याओं और भावनाओं पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है. समय पर उचित मार्गदर्शन और संवाद के अभाव में अनेक युवा मानसिक तनाव का सामना करते हुए गलत निर्णय ले रहे हैं.
ये विचार डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा जाल सभागृह में आयोजित युवाओं के मानसिक स्वास्थ्यः कारण एवं उपचार विषयक विचार गोष्ठी में विभिन्न विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यक्त किए. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल की पूर्व कुलपति डॉ. निशा दुबे ने कहा कि छोटे परिवार, माता-पिता दोनों के नौकरीपेशा होने तथा बच्चों को पर्याप्त समय नहीं मिल पाने के कारण युवा स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. इसका परिणाम समाज में बढ़ती आक्रामकता और मानसिक असंतुलन के रूप में सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि अकेलेपन के कारण अनेक युवा अपनी भावनाएं किसी से साझा नहीं कर पाते, जिससे वे दिग्भ्रमित हो रहे हैं.
गोष्ठी में सुश्री मनस्वी मोहंती, कंचन तारे, रामेश्वर गुप्ता, डॉ. मुकेश चौहान, श्याम सुंदर यादव, डॉ. एस.एल. गर्ग, डॉ. ओ.पी. जोशी, दिलीप वाघेला, रंजना नाईक, नेहा जैन, प्रो. असद खान एवं प्रणिता दीक्षित सहित अनेक वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में डॉ. रमा चौहान, रेहाना खान, नजमा खान एवं सौम्या पंडित सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
गंभीर चिंतन और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता
सेवानिवृत्त कलेक्टर सी.बी. सिंह ने कहा कि तनावग्रस्त युवा समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय जीवन से हार मानने जैसे गंभीर कदमों को आसान समझने लगे हैं. उन्होंने इस विषय पर समाज के सभी वर्गों से गंभीर चिंतन और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई. वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. रामगुलाम राजदान ने कहा कि शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को युवाओं के हित में आगे आकर सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए. उन्होंने नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो युवा पीढ़ी में भटकाव और बढ़ सकता है. अक्सर अभिभावकों को समस्या की जानकारी तब मिलती है, जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है.
