हाईकोर्ट ने कोर्ट स्लिप के दुरुपयोग पर कसा शिकंजा

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कोर्ट स्लिप के जरिए मामलों की लिस्टिंग कराने की अपारदर्शी व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अब प्रत्येक कोर्ट स्लिप पर संबंधित अधिवक्ता का पूरा नाम, एनरोलमेंट नंबर और मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य होगा। इस संबंध में सभी अधिवक्ताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे और सूचना काज लिस्ट में भी प्रकाशित की जाएगी।

दरअसल, जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष भैयाजी ठाकुर व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ अधिवक्ताओं ने हस्तक्षेप आवेदन स्वीकृत हुए बिना ही वकालतनामा दाखिल कर रखा है। इसके बावजूद वे कोर्ट स्लिप के माध्यम से लगातार प्रकरण की लिस्टिंग का आग्रह कर रहे थे। न्यायालय ने रिकार्ड का परीक्षण किया तो पाया कि प्रस्तुत कोर्ट स्लिप पर केवल हस्ताक्षर थे, लेकिन अधिवक्ता का नाम, एनरोलमेंट नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। इसी मामले में राज्य शासन और निजी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर के रूप में चार सप्ताह का समय दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद जवाब दाखिल करने का अधिकार स्वत: समाप्त हो जाएगा। अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में होगी। तब तक अंतरिम राहत प्रभावी रहेगी।

Next Post

नरसिंहपुर के गरहा में स्वास्थ्य केंद्र के सामने सामुदायिक भवन पर रोक

Fri Jul 10 , 2026
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने नरसिंहपुर जिले की जनपद पंचायत चावरपाठा के ग्राम गरहा स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने बनाए जा रहे सामुदायिक भवन के निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई […]

You May Like