मप्र कैबिनेट : खेती, कल्याण और कर्मचारियों के विलय पर मुहर,आदिवासियों को निःशुल्क रजिस्ट्री

भोपाल। मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की आज हुई बैठक में प्रदेश विकास, किसानों की आय, सिंचाई विस्तार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में बताया गया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूर्ण रूप से लागू किया और योजना के तहत किसानों को भुगतान दो माह के भीतर सुनिश्चित किया गया।

कैबिनेट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 29 जनवरी को उज्जैन में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित पशुपतिनाथ लोक के लोकार्पण का भी उल्लेख किया गया। साथ ही प्रदेश में पहली बार 30 जनवरी को भोपाल में आयोजित पुष्प महोत्सव को किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अभिनव पहल बताया गया, जिसे केवल प्रदर्शनी नहीं बल्कि कृषि आधारित उत्सव के रूप में सराहा गया।

बैठक में सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित 25,602 आदिवासी परिवारों के आवासीय पट्टों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ये परिवार पूर्व में पट्टे प्राप्त कर चुके थे, लेकिन रजिस्ट्री लंबित थी, जिसे अब सरकार अपने स्तर पर पूरा कराएगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं,धनवाही और बरही,को स्वीकृति प्रदान की, जिससे कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को निरंतर जारी रखने का भी निर्णय लिया गया, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।

प्रशासनिक स्तर पर एक अन्य अहम फैसले में राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों का महिला एवं बाल विकास विभाग में विलय करने की मंजूरी दी गई, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में समन्वय और दक्षता बढ़ने की संभावना जताई गई है। मंत्रिमंडल के इन निर्णयों को प्रदेश के सामाजिक, कृषि और बुनियादी विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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