महाराष्ट्र एटीएस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क पर कसा शिकंजा, राज्य भर में 40 से अधिक स्थानों पर छापे मारे

मुंबई, 10 जुलाई (वार्ता) महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने हाल के महीनों में अपने सबसे बड़े समन्वित अभियानों में से एक की शुरुआत करते हुए शुक्रवार को महाराष्ट्र भर में 40 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पाकिस्तान से गैंगस्टर शहजाद भट्टी द्वारा संचालित एक कथित आतंकवादी-गैंगस्टर नेटवर्क के सिलसिले में की गई है।
तड़के शुरू किया गया यह अभियान मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, मीरा रोड, नालासोपारा, पुणे, नासिक, नागपुर, जलगांव, अकोला, नांदेड़, सांगली, सतारा और छत्रपति संभाजीनगर में चलाया गया। यहां आतंकवाद निरोधी दस्ते की टीमों ने पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से संबंध रखने के संदिग्ध व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली। जांचकर्ताओं के अनुसार, भट्टी पर देश विरोधी गतिविधियों के लिए भर्ती करने से पहले युवाओं की पहचान करने, उन्हें असर में लेने और कट्टरपंथी बनाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कूटबद्ध संदेश ऐप और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का संदेह है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क का उपयोग चरमपंथी प्रचार फैलाने, स्लीपर मॉड्यूल स्थापित करने और सीमा पार से संचालित होने वाले आकाओं के साथ संचार की सुविधा के लिए किया जा रहा था।

सूत्रों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों को विशिष्ट इनपुट मिले थे, जिनसे संकेत मिला था कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस, भट्टी और उसके सहयोगियों के माध्यम से देश भर में विभिन्न स्थानों पर हमलों की कथित तौर पर साजिश रच रही थी। इस सूचना के बाद शुरुआती चरण में ही नेटवर्क की पहचान करने और उसे ध्वस्त करने के लिए राज्यव्यापी कार्रवाई की गई। आतंकवाद निरोधी दस्ता भट्टी के करीबी सहयोगी राणा अवीम उर्फ “राणा भाई” की भूमिका की भी जांच कर रहा है। राणा के बारे में माना जाता है कि वह पाकिस्तान से काम कर रहा है और कथित तौर पर इस मॉड्यूल की गतिविधियों का समन्वय कर रहा है। जांचकर्ता आरोपियों और उनके भारतीय संपर्कों के बीच संचार की जांच कर रहे हैं ताकि नेटवर्क के विस्तार का पता लगाया जा सके और भर्ती, रसद तथा वित्तपोषण में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही भट्टी, राणा अवीम और महाराष्ट्र के एक राजनीतिक नेता से जुड़े एक कथित विवाद की भी समानांतर जांच चल रही है। अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि क्या इस प्रतिद्वंद्विता का मॉड्यूल की गतिविधियों पर या एजेंसियों को प्राप्त खुफिया इनपुट पर कोई प्रभाव पड़ा था।

अभियान के दौरान, आतंकवाद निरोधी दस्ते की टीमों ने 100 से अधिक ऐसे लोगों से पूछताछ की, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूछताछ चल रही जांच का हिस्सा थी और आगे की कार्रवाई एकत्र किए गए सबूतों पर निर्भर करेगी। तलाशी टीमों ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल स्टोरेज उपकरणों के साथ-साथ जांच से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए हैं। साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों ने संचार चैनलों, वित्तीय लेनदेन, विदेशी संपर्कों और कथित नेटवर्क से जुड़े डिजिटल चिह्नों का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि यह समन्वित अभियान केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के परामर्श से कई हफ्तों में तैयार किए गए खुफिया इनपुट पर आधारित था। कुछ स्थानों पर तलाशी अभी भी जारी थी, और डिजिटल फोरेंसिक जांच के परिणाम के आधार पर कुछ और लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है तथा तलाशी ली जा सकती है। आतंकवाद निरोधी दस्ते ने जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया है।

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