नयी दिल्ली 25 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि पिछले एक दशक में शिक्षक समुदाय में महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
श्रीमती मुर्मु ने क्षेत्र में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं को नयी आपराधिक न्याय प्रणाली के केंद्र में रखा गया है। इसके अलावा, इन नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर काबू पाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा,“यह जानकर खुशी हुई है कि महिला शिक्षकों ने समाज परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले दशक के दौरान नियुक्त शिक्षकों में महिलाओं की भागीदारी 60 प्रतिशत से अधिक है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान सभा में देश के सभी हिस्सों और सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व था। सबसे अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि संविधान सभा में सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, हंसाबेन मेहता और मालती चौधरी जैसी 15 असाधारण महिलाएं भी शामिल थीं। दुनिया के कई हिस्सों में जब महिलाओं की समानता को एक सुदूर आदर्श समझा जाता था, तब भारत में, महिलाएं, राष्ट्र की नियति को आकार देने में सक्रिय योगदान दे रही थीं।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय प्रगति के बल पर हम अपना सिर ऊंचा करके भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे युवा, विशेषकर हमारी बेटियां देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेंगी।