मरने के बाद भी नहीं मिल रही शांति, अंतिम संस्कार हेतु दूसरे गांव पर निर्भर

बालाघाट। जनपद पंचायत खैरलांजी के सलेबर्डी ग्राम पंचायत अंतर्गत दैतबर्रा गांव के ग्रामीणों को मरने के बाद भी शांति नसीब नहीं हो रही है। शांति धाम न होने की वजह से ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए आज भी दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यह समस्या वर्षों से चल रही है, लेकिन हालात तब और बिगड़ गए जब गांव में शांति धाम के लिए निर्धारित भूमि पर ही अतिक्रमण कर लिया गया।

सरकार द्वारा दैतबर्रा गांव में शांति धाम निर्माण के लिए राशि तो स्वीकृत कर दी गई, लेकिन जिस जगह पर इसका निर्माण होना था, वहां कुछ ग्रामीणों ने कब्जा कर लिया है। भूमि पर बने इस अतिक्रमण को हटाने के लिए गांव के लोगों ने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

लगातार नजरअंदाज की जा रही इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को दैतबर्रा के दर्जनों ग्रामीण बालाघाट मुख्यालय पहुंचे। दोपहर लगभग 1 बजे उन्होंने जनसुनवाई में अधिकारियों को अपनी पीड़ा सुनाई और अतिक्रमण हटाकर जल्द शांति धाम निर्माण शुरू कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील आवश्यकता के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ता है। बारिश या आपात स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। लोगों का कहना है कि यह न केवल असुविधा है बल्कि मृतक के परिजनों के लिए मानसिक पीड़ा का कारण भी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मौखिक व लिखित शिकायतें करने के बावजूद अधिकारियों द्वारा मौके पर निरीक्षण या कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि प्रशासन यदि चाहे तो कुछ ही दिनों में अतिक्रमण हटाकर इस गंभीर समस्या का समाधान कर सकता है।

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