फर्जी पंजीयन से 60 करोड़ का खेल, खेतों में फसल नहीं फिर भी खरीदी का दावा

बैतूल। बैतूल जिले में समर्थन मूल्य पर ज्वार खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। प्रशासनिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि खरीदी के लिए पंजीकृत 1169 किसानों में से केवल 25 किसानों के खेतों में ही ज्वार की फसल थी। बाकी 1144 किसानों के खेतों में फसल का नामोनिशान तक नहीं मिला।

दरअसल, जांच में सामने आया कि कुछ व्यापारियों और रसूखदारों ने महाराष्ट्र से सस्ती ज्वार खरीदकर बैतूल में सरकारी समर्थन मूल्य 3699 प्रति क्विंटल पर बेचने की साजिश रची थी। इसके लिए बटाईदारों और सिकमी किसानों के नाम पर फर्जी पंजीयन कराए गए। कई असली किसानों को तो यह भी पता नहीं था कि उनके नाम से खरीदी का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

कृषि विभाग के रिकॉर्ड में 5234 हेक्टेयर में ज्वार बोने का दावा किया गया, जबकि वास्तविक खेती सिर्फ 1500 हेक्टेयर में पाई गई। अगर यह फर्जी खरीदी पूरी हो जाती, तो सरकार को करीब 60 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होता।

जांच में भैंसदेही, आठनेर, शाहपुर, घोड़ाडोंगरी और बैतूल ब्लॉकों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली। तहसीलदार जी.डी. पाठे के मुताबिक, उनके क्षेत्र में 290 किसानों का पंजीयन था, लेकिन मात्र दो ही असली निकले। गिरदावरी प्रक्रिया में गड़बड़ी कर ई-उपार्जन पोर्टल पर गलत डेटा अपलोड किया गया, जिससे पूरा खेल संभव हुआ।

अब तक फूड विभाग ने किसी अधिकारी या एजेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। सूत्र बताते हैं कि विभागीय स्तर पर मामला दबाने की कोशिशें चल रही हैं। वहीं असली किसानों की मांग है कि बटाई और खरीदी से जुड़े बैंक खातों व एग्रीमेंट की जांच कर घोटाले के असली चेहरों को उजागर किया जाए।

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