योग ही जीवन का सार, ‘मैं’ से ‘हम’ तक की यात्रा जरूरी 

इंदौर. “मैं से हम तक ही तो चलना है, व्यक्ति को भूलकर समाजहित में सक्रिय होना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है.” यह संदेश हरिओम योग केंद्र और चोइथराम कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ के योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग कॉन्फ्रेंस ‘योग संकल्प 2025’ के समापन सत्र में अतिथियों ने दिया.

डॉ. ओमानंद गुरुजी और सांसद शंकर लालवानी विशेष रुप से उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि पंचमहाभूत आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ही जीवन का आधार हैं. महर्षि पतंजलि, चरक और मुनि घेरंड ने हजारों वर्ष पूर्व जिस जीवनशैली की ओर संकेत किया था, उससे दूर जाने के कारण आज समाज भुक्तभोगी बन गया है. “हठयोग में वर्णित पंचशाक का स्थान आज पिज्जा और बर्गर ने ले लिया है, जिसे अब मिलेट्स से भरना होगा,” अतिथियों ने कहा. कॉन्फ्रेंस में इटली, फिनलैंड सहित देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. योग नृत्य, योग आकृति और योग व्यायाम का प्रदर्शन महिला साधकों और विद्यार्थियों ने किया. दूसरे दिन जयपुर यूनिवर्सिटी के डॉ. सुनील शर्मा ने ‘माइंड मिस्ट्री’, भोपाल की डॉ. विदु शेखर ने ‘प्राणिक हीलिंग’, पद्मश्री डॉ. खालिद वली ने ‘मिलेट्स एंड माइंड’ तथा बेंगलुरु के डॉ. ए. सुब्रमण्यम ने ‘मस्तिष्क की लहरें’ विषय पर व्याख्यान दिया. इस अवसर पर पेपर प्रेजेंटेशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डॉ. आरसी वर्मा, साक्षी जाधव (गोल्ड मेडल विजेता) और प्रथम विजेता चंद्रशेखर तिवारी को सम्मानित किया. स्वागत भाषण आयोजन अध्यक्ष अश्विनी वर्मा ने दिया, जबकि संचालन सचिव डॉ. संजय लौंढे ने कार्यक्रम में डॉ. अंतिम जैन, डॉ. हेमंत शर्मा और संजय चराटे सहित अनेक योग विशेषज्ञ उपस्थित देखे गए.

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