वॉशिंगटन, 30 जून (वार्ता) आम अमेरिकी परिवारों को फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से महंगे ईंधन, भोजन और अन्य खर्चों के रूप में लगभग 1,000 डॉलर (लगभग 94 हजार 600 रुपये) का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा है।
मूडीज एनालिटिक्स के इस अनुमान की जानकारी उसके मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी ने दी है।
यह आकलन ऐसे समय में आया है, जब मई में मुद्रास्फीति (महंगाई) तीन वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है और अमेरिका-ईरान स्थायी शांति समझौते के लिए प्रयासरत हैं। इस बीच दोनों पक्षों ने सप्ताहांत में एक-दूसरे पर सैन्य हमले भी किये, जिससे इस नाजुक युद्धविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था।
श्री जांडी के अनुसार, ईंधन की बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं पर सबसे बड़ा बोझ हैं। मई में पेट्रोल की कीमतें 4.56 डॉलर प्रति गैलन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी थीं। इसके बाद इस महीने वे चार डॉलर से नीचे आ गयीं। उनका अनुमान है कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से एक औसत परिवार ने पेट्रोल पर 300 डॉलर (28 हजार रुपये से भी ज्यादा) अतिरिक्त खर्च किये हैं।
सीबीएस न्यूज के अनुसार, डीजल की ऊंची कीमतों के कारण परिवहन लागत में भारी उछाल आया है, जिससे किराना और अन्य सामान की कीमतें पहले से भी अधिक बढ़ गयी है। श्री जांडी के अनुमान के मुताबिक, इसके परिणामस्वरूप परिवारों को भोजन पर लगभग 200 डॉलर (लगभग 19 हजार रुपये) अधिक खर्च करने पड़े हैं।
इस विश्लेषण में सामने आये अन्य अतिरिक्त खर्चों में ऊंची ब्याज दरों के कारण प्रति परिवार करीब 150 डॉलर (14 हजार रुपये से भी ज्यादा) का बोझ शामिल है, क्योंकि इस संघर्ष से जुड़े मुद्रास्फीति के दबाव ने फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है और इनमें और बढ़ोतरी की संभावना बढ़ा दी है। हवाई यात्रियों को भी बढ़े हुए किराये का सामना करना पड़ा है, जिससे जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण परिवारों को अनुमानित 100 डॉलर (लगभग साढ़े नौ हजार रुपये) अतिरिक्त चुकाने पड़े हैं।
इस संघर्ष से जुड़े सैन्य खर्च ने प्रति परिवार अनुमानित 250 डॉलर (साढ़े 23 हजार रुपये से अधिक) का अतिरिक्त बोझ और बढ़ा दिया है। जांडी ने कहा कि अमेरिका सैन्य अभियानों पर प्रतिदिन लगभग पांच करोड़ डॉलर (473 करोड़ 15 लाख रुपये) खर्च कर रहा है, जबकि अलग-अलग अनुमानों में अमेरिका पर युद्ध की कुल लागत लगभग 50 अरब डॉलर (4,731.5 अरब रुपये) बतायी जा रही है।
श्री जांडी ने कहा, “बहुत कम कर आंकने के बावजूद मेरा यह अनुमान है कि ईरान युद्ध के कारण एक आम अमेरिकी परिवार को अब तक 1,000 डॉलर का नुकसान हुआ है।” उनका तर्क है कि इसका वास्तविक वित्तीय प्रभाव संभवतः इससे काफी अधिक है।
अन्य अध्ययनों में भी उपभोक्ताओं पर पड़े इस बोझ की जानकारी दी गयी है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का अनुमान है कि संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक आम अमेरिकी नागरिकों ने केवल पेट्रोल और डीजल पर ही अतिरिक्त 64 अरब डॉलर (6,055.68 अरब रुपये) खर्च कर दिये हैं, जबकि ‘इंस्टीट्यूट ऑन टैक्सेशन्स एंड इकोनॉमिक पॉलिसी’ ने ईंधन की बढ़ी हुई लागत का गणित प्रति परिवार लगभग 427.50 डॉलर (लगभग साढ़े 40 हजार रुपये) निकाला है।
हाल के हफ्तों में राहत के कुछ संकेत मिले हैं, जहां राष्ट्रीय औसत पेट्रोल की कीमत एक महीने पहले के 4.39 डॉलर से घटकर 3.86 डॉलर प्रति गैलन पर आ गयी है, हालांकि यह अब भी युद्ध-पूर्व की 2.98 डॉलर की कीमत से अधिक है।
