पेरिस, (वार्ता) माजा च्वालिंस्का इस साल रौलां गैरो में सिर्फ़ इस उम्मीद के साथ उतरी थीं कि वह क्वालिफ़ाइंग राउंड पार कर लेंगी। लेकिन, उन्होंने इतिहास रच दिया और उनका सफ़र अभी खत्म नहीं हुआ है।
गुरुवार को 2 घंटे 10 मिनट में 25वीं सीड डायना श्नाइडर को 7-6 (4), 6-4 से हराने के बाद, 24 साल की यह खिलाड़ी टूर्नामेंट के इतिहास में फ़ाइनल में पहुँचने वाली पहली क्वालिफ़ायर बन गईं। वह रौलां गैरो के मेन-ड्रॉ में अपने पहले ही मैच में फ़ाइनल में पहुँचने वाली सिर्फ़ तीसरी महिला खिलाड़ी भी हैं; उनसे पहले इवोन गूलागोंग (1971) और क्रिस एवर्ट (1973) यह कारनामा कर चुकी हैं।
च्वालिंस्का जब पेरिस पहुँची थीं, तब उनकी करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 113 थी, और अब वह टॉप 20 में जगह बनाने के बेहद करीब हैं। इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि शनिवार को उनका मुकाबला एक और पहली बार फ़ाइनल में पहुँची खिलाड़ी मीरा एंड्रीवा से होगा, जहाँ उन्हें अपना पहला और बेहद अप्रत्याशित ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीतने का मौका मिलेगा।
च्वालिंस्का और एंड्रीवा के बीच यह पहला मुकाबला होगा। इस मुकाबले में टूर की दो सबसे बहुमुखी खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। यह उस ‘ताकत बनाम सटीकता’ की लड़ाई से बिल्कुल अलग होगा, जिसका सामना च्वालिंस्का ने श्नाइडर के खिलाफ़ किया था। वह एक बेहद थकाने वाला और शारीरिक रूप से ज़ोरदार दो-सेट का मुकाबला था, जिसमें च्वालिंस्का को अपने खेल की हर बारीकी और हुनर का इस्तेमाल करना पड़ा था।
