भोजशाला: एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद बढ़ा उत्साह, हनुमान चालीसा के साथ सत्याग्रह

धार। धार स्थित भोजशाला परिसर में मंगलवार को नियमित सत्याग्रह आयोजित किया गया। भोज उत्सव समिति द्वारा प्रति मंगलवार आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम के तहत हनुमान चालीसा का पाठ एवं पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए।

समिति पदाधिकारियों के अनुसार हाल ही में एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद समाज के लोगों में उत्साह देखा गया। भोजशाला को पूर्ण रूप से हिंदुओं को सौंपने तथा वहां मां सरस्वती की पूजा की अनुमति की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है।

इस अवसर पर भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, संरक्षक अशोक जैन, महाप्रबंधक हेमंत दौराया, महामंत्री सुमित चौधरी, विश्वास पांडे, मोहन राठौर, निखिल जोशी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अधिवक्ता श्रीश दुबे और भोजशाला मुक्ति यज्ञ संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला का वास्तविक स्वरूप सरस्वती कंठाभरण के रूप में होने के संकेत मिले हैं। उनके अनुसार परिसर की खुदाई में बहुमंजिला संरचना के प्रमाण सामने आए हैं तथा दो स्तंभ ऐसे मिले हैं, जिन पर ॐ सरस्वतयै नमः अंकित है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे अनेक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

अधिवक्ता दुबे के अनुसार 98 दिन चले सर्वे में एएसआई ने 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में पाए गए स्तंभों की कला और वास्तुकला के आधार पर यह दावा किया गया कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा रहे होंगे, जिन्हें बाद में पुनः उपयोग में लाया गया। वर्तमान संरचना में कुल 188 स्तंभ पाए जाने की बात कही गई है। कुछ स्तंभों पर उकेरी गई आकृतियों को विकृत किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे शिलालेख मिलने का दावा किया गया है, जिनसे परिसर के ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व का संकेत मिलता है। संयोजक शर्मा के अनुसार एक शिलालेख में परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख भी मिला है, जिनका शासनकाल 1094 से 1133 ईस्वी के बीच माना जाता है।

पदाधिकारियों ने बताया कि परिसर से 94 मूर्तियां, विभिन्न प्रकार की नक्काशीदार कलाकृतियां तथा 30 परमारकालीन सिक्के मिलने की बात सामने आई है। इन सिक्कों को चांदी, तांबा और अन्य धातुओं से निर्मित बताया गया है। उकेरी गई आकृतियों में विभिन्न देवी-देवताओं एवं पशु-पक्षियों की छवियां शामिल होने का दावा किया गया।

गोपाल शर्मा ने कहा कि सर्वे अभी पूर्ण नहीं हुआ है और परिसर के कुछ हिस्सों का सर्वे शेष है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध रिपोर्ट परिसर को सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है तथा यहां भव्य सरस्वती मंदिर स्थापित किए जाने की मांग दोहराई।

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