नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश के तेजी से बदलते ऋण बाजार और कॉरपोरेट बॉन्ड क्षेत्र में बढ़ती निवेशक भागीदारी को देखते हुए डिबेंचर ट्रस्टी व्यवस्था के नियामकीय ढांचे की व्यापक समीक्षा शुरू की है। सेबी ने डिबेंचर धारकों के हितों की बेहतर सुरक्षा और ट्रस्टियों की जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक विशेषज्ञ कार्य समूह का गठन किया है।
इस समिति की अध्यक्षता सेबी के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य अनंत बरुआ करेंगे, जबकि भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार सह-अध्यक्ष होंगे। समिति डिबेंचर ट्रस्टियों से जुड़े मौजूदा नियमों, विशेष रूप से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) (डिबेंचर ट्रस्टी) विनियम, 1993 की समीक्षा करेगी।
सेबी के अनुसार, 1993 में इन नियमों की शुरुआत के बाद वित्तीय क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2016 में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 लागू होने और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के कारण मौजूदा व्यवस्था को नए बाजार परिदृश्य के अनुरूप बनाना जरूरी हो गया है।
समिति डिबेंचर ट्रस्टियों की भूमिका और जिम्मेदारियों को मजबूत करने, उनकी न्यूनतम नेटवर्थ आवश्यकताओं की समीक्षा करने, अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने और नियमों में जरूरी बदलावों की सिफारिश करेगी।
कार्य समूह में ट्रस्टी सेवाओं, कानूनी क्षेत्र, रेटिंग एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और बाजार विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसमें एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज के एमडी एवं सीईओ राहुल चौधरी, बीकन ट्रस्टीशिप लिमिटेड के एमडी एवं सीईओ प्रतापसिंह नाथानी, डीएसके लीगल के पार्टनर आशीष पहाड़िया, विनोद कोठारी एंड कंपनी के पार्टनर विनोद कोठारी सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं।
सेबी ने आम जनता, बाजार प्रतिभागियों और अन्य हितधारकों से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझावों में नियमों को सरल बनाने, अनावश्यक प्रावधानों को हटाने, बाजार में हुए बदलावों के अनुसार नियमों को अपडेट करने और डिबेंचर ट्रस्टियों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय शामिल किए जा सकते हैं। सुझाव 15 जुलाई 2026 तक निर्धारित प्रारूप में जमा किए जा सकेंगे।
