नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सरकारी उपक्रमों पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) और आरईसी लिमिटेड (आरईसी) के निदेशक मंडलों ने दोनों कंपनियों के विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बिजली मंत्रालय की मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार बोर्ड ने आरईसी को पीएफसी में विलीन करने की योजना को स्वीकृति दे दी है। आरईसी के पीएफसी में विलय होने से पीएफसी के कर्ज कारोबार का पोर्टफाेलियो बढ़ कर 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। विलय की यह योजना सभी विनियामकी और अधिनियमित स्वीकृतियों और सहमतियों के बाद पूरी होगी। इसमें दोनों कंपनियों के संबंधित शेयरधारकों और लेनदारों तथा सभी प्रासंगिक नियामक और सरकारी प्राधिकरणों से अनुमोदन शामिल हैं।
विलय के बाद काम करने वाला उपक्रम भी कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत ‘सरकारी कंपनी’ बना रहेगा तथा उसमें केंद्र सरकार की बहुमत की हिस्सेदारी बनी रहेगी। कंपनी पर सरकार का नियंत्रण भी बना रहेगा। विलय की योजना और मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित विलय के लिए आरईसी के दस-दस रुपये के अंकित मूल्य वाले प्रत्येक 100 शेयर के बदले पीएफसी के 88 शेयर जारी किए जाएंगे।
इस योजना को लागू कराने में दोनों कंपनियों की सहायता के लिए डेलॉयट टच तोहमात्सु इंडिया लेनदेन एवं कर सलाहकार तथा सिरिल अमरचंद मंगलदास कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। पीएफसी द्वारा आरबीएसए वैल्यूएशन एडवाइजर्स एलएलपी तथा आरईसी द्वारा अर्न्स्ट एंड यंग मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज एलएलपी को संयुक्त मूल्यांकन रिपोर्ट प्रदान करने के लिए नियुक्त किया गया था। पीएफसी द्वारा एसबीआई कैपिटल मार्केट्स तथा आरईसी द्वारा नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को संयुक्त मूल्यांकन रिपोर्टों पर अपनी-अपनी निष्पक्ष राय प्रदान करने के लिए नियुक्त किया गया था।

