डोनाल्ड ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, अमेरिका के साथ दोहा वार्ता अभी टली

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़े दावे के बाद ईरान ने कतर की राजधानी में होने वाली किसी भी बैठक से साफ इनकार कर दिया है। यह शांति समझौते के लिए बड़ा झटका है।

अमेरिका ईरान पीस वार्ता को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली बैठक को सिरे से नकार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि दोनों देशों के अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में मुलाकात करेंगे। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बात को पूरी तरह से गलत बताया है। यह बयान ट्रंप की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आया है जिससे नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। हालांकि उनका एक प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह कतर की यात्रा जरूर करेगा लेकिन इसका अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं है। इस बयान ने होर्मुज में जहाजों के गुजरने और नाजुक शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत पर पानी फेर दिया है। यह घटनाक्रम कूटनीतिक संबंधों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्विट्जरलैंड शांति समझौते पर संकट
कुछ ही दिन पहले दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में सैन्य संघर्ष को खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण डील हुई थी। ऐसा लग रहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रही महाजंग अब खत्म होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच फिर से गहरे मतभेद पैदा हो गए। इसके बाद ईरान के नए बयान ने शांति समझौते की लाइफलाइन को काफी कमजोर कर दिया है।

बमबारी और तनाव का नया दौर
ईरान द्वारा उठाए गए कुछ सख्त कदमों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई शहरों में जमकर बमबारी की थी। इससे दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया था। परस्पर विरोधी बयानों ने दोनों मुल्कों के बीच कूटनीति के भविष्य को लेकर दुनिया भर में एक नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। यह स्थिति वैश्विक शांति और व्यापार के लिए भी बहुत बड़ा खतरा बनती जा रही है।

14-सूत्रीय समझौते का क्या होगा
अमेरिका और ईरान पिछले चार महीने तक चले भयंकर संघर्ष को खत्म करने के प्रयास में जुटे हुए थे। दोनों देश एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन को बनाए रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत दोनों देशों ने सैन्य संघर्ष को रोकने और व्यापार के लिए होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी। बातचीत रुकने से इन सभी अहम फैसलों के लागू होने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उन्होंने दावा किया था कि तेहरान ने खुद अमेरिका के साथ इस शांति बातचीत की गुजारिश की थी। बाद में व्हाइट हाउस ने भी इस अहम बैठक की पुष्टि करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया था।

दोहा जाने वाले थे अमेरिकी दूत
व्हाइट हाउस ने बताया था कि राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस हाई लेवल मीटिंग में हिस्सा लेने वाले थे। उनके साथ जेरेड कुशनर भी शांति वार्ता के लिए कतर की राजधानी दोहा जाने वाले थे। लेकिन ईरान के अचानक आए इस बयान ने अमेरिकी प्रशासन की सभी तैयारियों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कतर यात्रा पर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि एक प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह कतर जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी अधिकारियों के साथ वार्ता से कोई संबंध नहीं है। ईरान की पहली प्राथमिकता फिलहाल अपनी डील से संबंधित एमओयू के प्रमुख प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करना है।

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