मोरवा विस्थापन पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ी लोगों की नाराजगी

सिंगरौली : मोरवा क्षेत्र में प्रस्तावित एनसीएल अधिग्रहण को लेकर प्रभावित परिवारों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन विस्थापितों के पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार, व्यापारिक पुनर्स्थापना और मूलभूत सुविधाओं को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे हजारों परिवारों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ विस्थापितों के हितों की भी समान रूप से रक्षा होना आवश्यक है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि मोरवा क्षेत्र के करीब 50 हजार लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस अधिग्रहण से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें व्यापारी, छोटे व्यवसायी, मजदूर, किरायेदार और आम नागरिक शामिल हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो हजारों परिवारों के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो जाएगा। सबसे अधिक चिंता बच्चों की शिक्षा, व्यापार के भविष्य और आजीविका को लेकर जताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

उनका कहना है कि जनता ने अपने अधिकारों की रक्षा और विकास की उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन आज जब सबसे बड़ा विस्थापन सामने है, तब उनकी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। यही कारण है कि क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि प्रभारी मंत्री संपतिया उइके के पिछले दो वर्षों के दौरान सिंगरौली प्रवास के समय महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार ज्ञापन सौंपकर मोरवा विस्थापन से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया था। इसके बावजूद अब तक एनसीएल, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच कोई ऐसी निर्णायक बैठक नहीं हुई, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत या भरोसा मिल सके।

विस्थापन की पूरी कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि राज्य सरकार, जिला प्रशासन और एनसीएल को संयुक्त रूप से आगे आकर विस्थापन की पूरी कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए। उनका मानना है कि पुनर्वास स्थल, मुआवजा, रोजगार, व्यापारिक पुनर्स्थापना, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर स्पष्ट निर्णय लिए बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। प्रभावित नागरिकों ने मांग की है कि शीघ्र ही एनसीएल, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और प्रभावित परिवारों की संयुक्त बैठक आयोजित कर सभी बिंदुओं पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि समय रहते पारदर्शी और न्यायसंगत समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में हजारों परिवार गंभीर सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने के लिए मजबूर होंगे। विकास के साथ विस्थापितों के सम्मानजनक पुनर्वास और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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