नयी दिल्ली, (वार्ता) देश की सोलर पीवी मॉड्यूल (सौर पैनल) विनिर्माण क्षमता बढ़कर 100 गीगावाट हो गयी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस उपलब्धि को मील का पत्थर बताया है।
श्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मील का पत्थर है। उन्होंने लिखा, “ यह देश की विनिर्माण क्षमता और स्वच्छ ऊर्जा को लोकप्रिय बनाने के हमारे प्रयासों ’की सफलता की गाथा है।”
इससे पहले, श्री जोशी ने एक्स पर एक पोस्ट में ग्राफिक्स के जरिये बताया कि साल 2014 में देश के सौर पैनल की विनिर्माण क्षमता 2.3 गीगावाट थी जो साल 2025 में बढ़कर 100 गीगावाट हो गयी है। उन्होंने इसे देश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में मील का पत्थर बताया।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मॉडल एवं विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची (एएलएमएम) में शामिल कंपनियों की कुल क्षमता 100 गीगावाट पर पहुंच गयी है। सरकार का लक्ष्य देश को सौर पैनल विनिर्माण में आत्मनिर्भर और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्रमुख स्थान दिलाना है। इसके लिए सरकार ने ज्यादा दक्षता वाले सौर पैनलों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना में शामिल किया है। साथ ही घरेलू विनिर्माताओं को समान अवसर प्रदान कर रही है।
श्री जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और साल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में हमारी यात्रा को मजबूती प्रदान करती है।
पहली एएलएमएम सूची 10 मार्च 2021 के प्रकाशित की गयी थी। उस समय इसमें 21 कंपनियां थीं, जिनकी उत्पादन क्षमता 8.2 गीगावाट थी। वर्तमान में इस सूची में 123 कंपनियां हैं।
