नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर अनिश्चितता के कारण आज एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2% तक लुढ़क गया है, वहीं जापान का निक्केई भी 1% की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है। इस तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है और ब्रेंट क्रूड 72.6 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गया है।
भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत
विदेशी बाजारों में मचे इस कोहराम के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी खबरें आ रही हैं। जानकारों के अनुसार, भारतीय बाजार का आंतरिक ढांचा काफी मजबूत बना हुआ है। निफ्टी के 34 अंक ऊपर खुलने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि बैंक निफ्टी में भी तेजी का अनुमान लगाया जा रहा है। यह घरेलू निवेशकों के लिए राहत की बात है कि भारतीय बाजार फिलहाल वैश्विक अस्थिरता के बावजूद संभला हुआ नजर आ रहा है।
टेक कंपनियों और फेड का दबाव
बाजार पर केवल भू-राजनीतिक तनाव ही नहीं, बल्कि तकनीकी क्षेत्र का भी दबाव है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों की बढ़ती वैल्यूएशन और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों में चिंता पैदा कर दी है। बड़ी टेक कंपनियों की कमाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और बाजार के मूल्यांकन ने विपरीत चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

