रेलवे परिसर में फिर अग्रि दुर्घटना का अंदेशा

सतना :रेलवे परिसर में आग लगने की दो बड़ी और दर्जन भर छोटी घटनाओं के बावजूद भी स्थानीय रेल प्रबंधन सबक लेने को तैयार नजर नहीं आ रहा है. अभी पिछले दिनों प्लेटफार्म क्र. 1 से सटे क्षेत्र में भडक़ी आग की लपटें ट्रेन तक पहुंचती नजर आने लगी थीं. वहीं अब उसी स्थान पर एक बार फिर से ज्वलनशील कबाड़ का जखीरा एकत्र हो चुका है.रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्र. 1 और अंधेरी पुलिया से सटे क्षेत्र में इन दिनों  प्लास्टिक की खाली बोतलें और डिस्पोजल गिलास व कप का जखीरा पसर चुका है.

आलम यह है कि इस स्थान पर लंबे-चौड़े क्षेत्र में इन स्लास्टिक कचरे के कई छोटे-छोटे पहाड़ बन चुके हैं. यह तथ्य भी किसी से छिपा नहीं है कि अंधेरी पुलिया और आस पास के क्षेत्र में कई तरह के नशेडिय़ों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है. यदि किसी ने भी वहां पर मौजूद प्लास्टिक के जखीरे पर आग लगा दी तो उससे उठने वाली लपटों को जल शोधन केंद्र से लेकर प्लेटफार्म क्र. 1 तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी. इतना ही नहीं यदि आग का दायरा बढ़ा तो अप ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हो सकता है.

गौरतलब है कि डीजल इंजनों में इंधन भरने के साथ ही तेल डिपो के संचालन से संबंधित कुछ पाइपलाइन पुरानी और आंशिक तौर पर क्षतिग्रस्त बताई जाती है. जिनके जरिए तेल रिस कर न सिर्फ अंधेरी पुलिया की नाली तक पहुंचता है बल्कि उसके आस पास एकत्र होकर पानी के ऊपर तैरता रहता है. लिहाजा आग पकडऩे पर यह स्थिति और भी अधिक खतरनाक साबित हो सकती है. लेकिन अगा लगने की 2 बड़ी और दर्जन भर छोटी घटनाओं के बावजूद भी स्थानीय रेल प्रबंधन इन ज्वलनशील प्लास्टिक के जखीरे को लगातार अनदेखा करता नजर आ रहा है.

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