नयी दिल्ली 27 जून (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने विद्यालय के पाठ्यक्रम में आपातकाल को शामिल किये जाने की निंदा करने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है और कहा है कि उसने दशकों तक इतिहास को अपनी राजनीतिक सुविधा के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया। श्री मालवीय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि कांग्रेस ने उन बातों को उभारा जो उसके अनुकूल थीं और उन बातों को दबा दिया जिनसे उसकी नाकामियां उजागर होती थीं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने विद्यालय के पाठ्यक्रम में आपातकाल को शामिल करने की निंदा करते हुए इसे केंद्र सरकार की ‘विभाजनकारी राजनीति’ करार दिया है।
श्री मालवीय ने कहा कि विद्यालय के पाठ्यक्रम में ‘आपातकाल’ को शामिल किए जाने पर कांग्रेस की बेचैनी पूरी तरह समझ में आती है। दशकों तक उसने इतिहास को अपनी राजनीतिक सुविधा के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया। उन बातों को उभारा जो उसकी कहने के अनुकूल थीं और उन बातों को दबा दिया जिनसे उसकी नाकामियां उजागर होती थीं। उन्होंने कहा कि आपातकाल आज़ाद भारत के संवैधानिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक था। लोकतंत्र का गला घोंटा गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर पाबंदियां लगाई गयीं, राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया गया और संस्थाओं को अपने नियंत्रण में कर लिया गया।
फिर भी विद्यार्थियों की कई पीढ़ियों को संविधान पर हुए इस अभूतपूर्व हमले के बारे में बहुत कम या कुछ भी नहीं पढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के बारे में पढ़ाना कोई वैचारिक कवायद नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक दायित्व है। हर विद्यार्थी को यह जानने का अधिकार है कि जब बिना किसी रोक-टोक वाली कार्यपालिका की शक्ति श्रीमती इंदिरा गांधी जैसे लोगों के हाथों में चली जाती है, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं को कैसे कमजोर किया जा सकता है। इस अध्याय को याद रखना इसलिए ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी ज्यादतियां दोबारा न हों।
भाजपा नेता ने कहा कि शिक्षा में विचारधारा पर किसी को उपदेश देने वाली आखिरी पार्टी कांग्रेस होनी चाहिए। दशकों तक उसने अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप पाठ्यपुस्तकें तैयार कीं। उसने मुगल काल पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर दिया, जबकि आलोचकों का तर्क है कि उसने भारत की सभ्यतागत विरासत और उन अनेक शासकों पर अपर्याप्त ध्यान दिया जिन्होंने आक्रमणों का प्रतिरोध किया और देश की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की। उन्होंने कहा कि एक परिपक्व लोकतंत्र अपने सबसे काले अध्यायों को मिटाता नहीं है। वह उनके बारे में पढ़ाता है, उनसे सीखता है और यह सुनिश्चित करता है कि आने वाली पीढ़ियां आज़ादी के मूल्य और उसे खोने की कीमत, दोनों को समझें।

