आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को लेकर कांग्रेस का धरना, 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो क्रमिक भूख हड़ताल की चेतावनी

सारनी: नगर पालिका सारनी में आउटसोर्स कर्मचारियों को निर्धारित मजदूरी और अन्य वैधानिक सुविधाएं नहीं मिलने के आरोपों को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल की। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) हितेश शाक्य को ज्ञापन सौंपकर ठेका श्रमिकों को शासन द्वारा तय पूरा वेतन और ईपीएफ सहित सभी श्रमिक अधिकार उपलब्ध कराने की मांग की।

भूख हड़ताल को संबोधित करते हुए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बटेश्वर भारती ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को निर्धारित मजदूरी नहीं दी जा रही और भविष्य निधि (ईपीएफ) संबंधी प्रक्रियाओं में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनका आरोप था कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है।कांग्रेस नेताओं प्रदीप नागले और सुरेश पंड्या ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि मजदूरों को पूरा वेतन और ईपीएफ का लाभ नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

मंडलम अध्यक्ष हेमंत धोटे, भूषण कांति, एस.के. उपरीत और सुनील भलावी ने नगर पालिका प्रशासन को 10 दिन के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।धरने में नेता प्रतिपक्ष पिंटिश नागले, महेंद्र भारती, तिरुपति अरेलू, गोविंदा अरेलू, आनंद नागले, मोहम्मद ताहिर, किरण झारबड़े, वसीम खान, राफे बॉक्स, मनी सुब्रह्मण्यम, रामाश्रय वर्मा, मनोज ठाकुर, प्रवीण पाल, गौतम नागले, विष्णु भारती, चंद्र सोनकर, ममता साहू, संदीप मस्की, दीपक ठाकरे, शेख अप्पू, मिलिंद थोरात, श्याम चौरे, लक्ष्मी गोहे, नितिन राजपूत, प्रकाश मालवीय, देवेंद्र उइके, शोभा दत्ता सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जिला पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
भूख हड़ताल के दौरान जिला कांग्रेस के अधिकांश पदाधिकारी कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे, जिसे लेकर संगठन के भीतर चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नेताओं का कहना है कि सारनी क्षेत्र के कई नेताओं को जिला कार्यकारिणी और विभिन्न प्रकोष्ठों में जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन आंदोलन में उनकी गैरहाजिरी से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कुछ नेताओं ने जिला नेतृत्व से निष्क्रिय पदाधिकारियों की समीक्षा कर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की मांग भी उठाई।

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