नई दिल्ली; 18 जून (वार्ता) देश के निर्यात संघों के महासंघ फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने अमेरिका और ईरान समझौते को एक ऐतिहासिक कामयाबी बताते हुए कहा है कि इससे आगे वैश्विक व्यापार के तौर-तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।
श्री रल्हन ने कहा कि यह राजनयिक घटनाक्रम ने निर्यात- आयात कारोबार से जुड़े भारतीय समुदाय के लिए व्यापक आर्थिक राहत दी है और व्यापार में कई महीनों से क्षेत्रीय रुकावट हटने पर यह आर्थिक वृद्धि के एक मज़बूत उत्प्रेरक का काम करेगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से उस क्षेत्र के साथ व्यापार में बड़ी कमी आ गयी थी निर्यात बहुत गिर गया था। इसका घरेलू अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ा था।
श्री रल्हन ने कहा, ” लड़ाई खत्म होने और क्षेत्र के व्यापक आर्थिक एकीकरण के साथ, हमें उम्मीद है कि ऑर्डर बुक में तुरंत और ज़बरदस्त सुधार होगा। पश्चिम एशिया में स्थिरता आने से रुकी हुई उपभोक्ता और औद्योगिक मांग चल पड़ेगी जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए अपनी मौजूदगी बढ़ाने और आने वाली कुछ फाइनेंशियल तिमाहियों में निर्यात की रफ़्तार तेज़ करने का फिर रास्ता मिलेगा है।”
फियो अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के बाद, ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज़ी गिरावट आयी है और यह 78 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गई है। यह भारत जैसे देश के लिए बड़ी राहत है जो तेल के लिए 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। ऊर्जा की लागत कम होने से मुद्रास्फीति शांत होगी और भारतीय माल की प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार होगा।
एनर्जी की सप्लाई में आ रही रुकावट कम होने भारतीय रुपये को मज़बूत समर्थन मिला है और रुपया मजबूत हो कर प्रति डॉलर 94–94.50 पर आ गया है। श्री रल्हन ने कहा , ‘ निर्यातकों के लिए, एक स्थिर और अनुमान लगाने योग्य करेंसी सुरक्षित हेजिंग सुनिश्चित करती है, मार्जिन को सुरक्षा प्रदान करती है, और व्यापार अनुबंधों को प्रभावित करने वाली अस्थिरता को खत्म करती है।”
उन्होंने कहा कि चालू खाते का घाटा कम होने से (सीएडी) पर कम दबाव पूरी अर्थव्यवस्था को राजकोषीय स्तर पर काम करने की ज़्यादा गुंजाइश देता है।
फियो अध्यक्ष ने कहा, ”लॉजिस्टिक्स के नज़रिए से, यह एमओयू बाजी पलटने वाला है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य का तुरंत फिर से खुलना—जहाँ से भारत का लगभग आधा कच्चा तेल आयात और कंटेनर ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है—ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए सबसे बड़ी राहत है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटने और सामान्य ट्रैफिक बहाल होने से समुद्री रास्ते के लंबे चक्कर खत्म हो जाएंगे। इससे ईयू, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका को हमारा निर्यात काफी प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। पहले निर्यातक बहुत ज़्यादा फ्रेट फीस और “युद्ध-जोखिम” इंश्योरेंस प्रीमियम के बोझ तले दबे हुए थे। हालात सामान्य होने से ये अतिरिक्त खर्च कम हो जाएंगे, जिससे पश्चिम एशिया और यूरोपीय जगहों तक वस्तुओं को पहुँचाना आसान, तेज़ और काफी सस्ता हो जाएगा।”
