इंदौर: इंदौर में पानी की समस्या और जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार आवाज़ उठ रही है. इसी क्रम में पिपलियाहाना को बचाने के लिए बृजेश्वरी रहवासी संघ सक्रिय भूमिका निभा रहा है.बृजेश्वरी रहवासी संघ के पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालाब तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर नगर निगम द्वारा की गई पहल अधूरी और असंतुलित है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल प्रवाह के लिए केवल एक छोटी नाली का निर्माण कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि वास्तविक आवश्यकता के अनुसार समुचित कैनाल व्यवस्था नहीं बनाई गई.
रहवासियों के अनुसार, जिस क्षेत्र से पानी को तालाब तक पहुंचाया जाना है, वहां सड़क और आसपास की संरचनाएं लगभग डेढ़ से दो फीट ऊंची हैं. ऐसे में सामान्य जल निकासी से पानी का प्रवाह तालाब तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. विशेषकर जहां मछली बाजार और अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं, वहां ढाल और लेवलिंग की समस्या प्रमुख है. इस आंदोलन और प्रयास में मनीष शर्मा, अमित विजयवर्गीय, विष्णु शर्मा, यशवंत राठौर, अनिल जेठवानी, साक्षात शर्मा, डॉ. इंदु भान, डॉ. महेंद्र चौरसिया, नीलेश अग्रवाल,धीरज अग्रवाल , हेमंत शर्मा , नितिन दुबे,श्याम डांगी सहित कई स्थानीय निवासी सक्रिय रूप से शामिल है. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पिपलियाहाना तालाब के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए ठोस और वैज्ञानिक योजना लागू करे, ताकि आने वाले समय में जल संकट को कम किया जा सके.
दीवार और अवरोध पर भी आपत्ति
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि तालाब के बीच में बनी एक दीवार को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इसके कारण जल संचयन और प्रवाह दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
बोरवेल रिचार्ज पर प्रभाव
रहवासी संघ का मानना है कि यदि तालाब में सही ढंग से पानी पहुंचाया जाए, तो यह न केवल जल स्रोत को पुनर्जीवित करेगा बल्कि आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर को भी रिचार्ज करने में मदद करेगा.
इस मुद्दे पर मनीष शर्मा सहित कई स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि नगर निगम को केवल नाली निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे कैचमेंट एरिया और जल प्रवाह की तकनीकी समीक्षा करके स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
