उज्जैन: इंदौर से महाकाल की नगरी पहुंचने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग बनने जा रहा है, त्रिवेणी हिल्स कॉलोनी के पीछे शिप्रा नदी के ऊपर ब्रिज का निर्माण हो रहा है. ये मार्ग ग्राम सिकंदरी होता हुआ सिंहस्थ बायपास मार्ग से कनेक्ट होगा.इस प्रस्तावित फोरलेन पुल और संपर्क मार्ग की लागत लगभग 24.81 करोड़ रुपये है. इंदौर रोड डी मार्ट और अंजू श्री होटल के सामने से त्रिवेणी हिल्स कॉलोनी से होती हुई फोरलेन सड़क बनाकर तैयार है. इसके आगे पुल का निर्माण चल रहा है.
शहर के भीतर भीड़ से मुक्ति
50 करोड़ श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव चाहते है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इंदौर की तरफ से ही प्रतिदिन आएंगे, ऐसे में शहर में क्राउड ना बढ़े और सीधे यात्री मेला क्षेत्र में पहुंच सके इसलिए यह मार्ग सुलभ होगा. श्रद्धालुओं को शहर के भीतरी हिस्सों के भारी यातायात से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे सीधे मेला क्षेत्र, पड़ाव क्षेत्र, घाटों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच सकेंगे.
आत्मलिंगेश्वर धाम नया केंद्र
जहां पुल बन रहा है उसके समीप आत्मलिंगेश्वर महादेव मंदिर आने वाले वर्षों में एक बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. शिप्रा तट के समीप स्थित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक वातावरण और सेवा गतिविधियों के कारण पहले से ही श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. मंदिर परिसर के आसपास यज्ञशाला, धर्मशाला, गौशाला और अन्य धार्मिक सुविधाओं के विस्तार की तैयारियां चल रही हैं. यहां स्थित प्रसिद्ध बस का बगीचा वर्षों से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. सिंहस्थ-2028 में इस पूरे क्षेत्र को और विकसित कर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा.
सेवा, भंडारे और संत परंपरा का संगम
नवभारत से चर्चा में शशांक गोरे और लक्की गुरु ने बताया कि क्षेत्र में वर्षों से निःस्वार्थ सेवा का कार्य किया जा रहा है. बम भोला द्वारा स्थापित कुटिया का लगातार विस्तार किया जा रहा है और बड़ी संख्या में सेवक यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहते हैं।उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान यहां विशाल भंडारे, लंगर और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाएगी. देश-विदेश से आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान विश्राम, दर्शन और आध्यात्मिक अनुभूति का प्रमुख केंद्र बनेगा. महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और भविष्य में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है.
