भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक की विशेषता यह रही कि यहां केवल विचार नहीं, बल्कि समाज के विविध वर्गों द्वारा किए जा रहे रचनात्मक कार्यों का जीवंत प्रस्तुतीकरण हुआ। इस बैठक ने स्पष्ट संदेश दिया कि सामाजिक समरसता भाषणों से नहीं, बल्कि आचरण, संवाद और सहयोग से सशक्त होती है।
बैठक को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का स्वभाव रहा है। समाज शब्द का अर्थ समान लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला समूह है। कानून समाज को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन उसे जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता हमारी पहचान है और हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि ऐसा स्वभाव है जो मत, पूजा पद्धति और जीवनशैली के आधार पर विभाजन नहीं करता।
प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक समाज अपने स्तर पर कार्य कर रहा है, लेकिन राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने संघ और शिव के भाव को समान बताते हुए त्याग, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की बात कही।बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुधार और संस्कारों से जुड़े कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज स्वयं पहल कर, बिना सरकारी प्रतीक्षा के, एक समाज एक राष्ट्र के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य करेगा।
