
कोटा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार शाम कोटा के श्री राम रंगमंच मैदान में आयोजित छात्र आंदोलन शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ कार्यक्रम में छात्रों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर अपनी बात रखी।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्हें लाखों युवा मिले, जो डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आईएएस और सेना में जाने का सपना देखते थे। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके मन में सवाल उठा कि देश की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को केवल कुछ गिने-चुने करियर विकल्पों तक ही क्यों सीमित कर रही है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने कई लड़कियों से बातचीत की और पूछा कि वे वास्तव में अपने जीवन में क्या करना चाहती हैं। राहुल गांधी के अनुसार, कई छात्राओं ने इन पारंपरिक पांच-छह पेशों से अलग अपनी इच्छाएं बताईं। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि शिक्षा व्यवस्था बच्चों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन्हें सीमित विकल्पों की ओर धकेल रही है।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि देश को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें कोई भी विद्यार्थी इस स्थिति में न पहुंचे कि वह अपनी जान देने के बारे में सोचे।
उन्होंने आकांक्षा नाम की छात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती थी। उसके पिता ने कर्ज लेकर उसकी पढ़ाई कराई, लेकिन नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद वह टूट गई। राहुल गांधी ने कहा कि आकांक्षा ने अपनी चिट्ठी में लिखा था सॉरी मम्मी-पापा, मैंने आप लोगों का सब बर्बाद कर दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए किसी एक छात्र को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि समस्या देश की शिक्षा व्यवस्था में है और सभी को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए काम करना होगा, जिसमें छात्रों को अवसर, सुरक्षा और अपने सपनों को पूरा करने का भरोसा मिल सके।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कुछ नौकरियों तक पहुंच बनाना नहीं, बल्कि युवाओं की प्रतिभा और रुचि के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना होना चाहिए।
