डिजिटल जाल: अब कानून के रखवाले भी नहीं सुरक्षित

जबलपुर: डिजिटल क्रांति के साथ साइबर क्राइम का ग्राफ भी तेजी से लगातार बढ़ता जा रहा है। साइबर ठग हर दिन नए-नए पैंतरे अपनाकर खातों से रकम उड़ा रहे है। अब इन ठगों को खाकीधारियों का भी डर और खौफ नहीं रह गया है वे बेधडक़ कानून के रखवालों को निशाना बना रहे है। जनता को साइबर ठगी से बचने के गुर सिखाने वाली खाकी भी इनके चंगुल में फंस रही है। पुलिस रिकॉर्ड में हाल ही में कुछ ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें शातिर साइबर अपराधियों ने पुलिस जवानों को अपना आसान शिकार बना उनके बैंक खातों से गाढ़ी कमाई साफ की है। इन ठगों के बुने डिजिटल जाल में पुलिस जवानों ने फंसकर लाखों रुपये गंवा दिए है। ये ठगी की वारदातें चिंताजनक है साथ ही सवाल उठा रही है कि जब कानून के रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी । आम नागरिक साइबर अपराध होने पर सबसे पहले पुलिस की चौखट तक पहुंंचता है आपबीती सुनाता है, ऐसे में जब खुद पुलिस के जवान इन शातिर ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है।
ये तरीके अपना लगा रहे चपत
मार्च माह में ऐसे मामले सामने आए जिसमें साइबर ठगों ने पुलिस जवान, एक रिटायर्ड पुलिस कर्मी को निशाना बनाया। जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी पुलिसकर्मियों को फंसाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बिजली बिल अपडेट करने का झांसा देकर ठग ने मोबाइल हैक कर खाता साफ किया है बल्कि स्मार्ट मीटर अपडेट करने और रिफंड दिलाने के नाम पर मोबाइल हैक कर खाते से रकम उड़ाई है। इसके अलावा गुमे मोबाइल से भी खाता खाली किया है।
सावधानी हटी और खाता हुआ खाली
साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे कानून के रखवालों को भी अपना निशाना बना रहे है सावधानी हटते ही खाता खाली कर रहे है। हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों के साथ हुई ठगी की वारदातों ने महकमे की नींद उड़ा दी है। हालांकि पूर्व में साइबर ठगें के मकडज़ाल में फंसकर कई पुलिस कर्मी साइबर ठगी का शिकार बन चुके। ऐसे में साइबर एक्सपट्र्स का कहना है कि चाहे आम आदमी हो या खाकी वर्दी वाला, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करना और बिना जांचे पैसे ट्रांसफर न करना ही एकमात्र बचाव है।
एक्सपर्ट-मुखबिर तंत्र फेल
पुलिस साइबर ठगी के मामलों में कायमी तो दर्ज कर लेती है लेकिन अपराधी पुलिस को ढूंढे नहीं मिलते है, थाना पुलिस साइबर सेल की भी मदद लेती है, लंबी जांच पड़ताल के बाद केस डायरी बंद कर दी जाती है और मामले थानों में धूल खाते रहते है। पुलिस का मुखबिर तंत्र कमजोर, तकनीकी, एक्सपर्ट फेल हो जाते है। दर्जनों मामलों में से इक्कादुक्का ही पुलिस सुलझा पाती है। अधिकतर मामलों में न तो आरोपित का नाम पता पुलिस के पास होता है और न ही उसका सही ठिकाना पुलिस खोज पाती है।

केस 1
विनायक नगर चरगवां निवासी नरेन्द्र कुमार आईटीबीपी की 36 वीं बटालियन में प्रधान आरक्षक है। बिजली बिल अपडेट करने का झांसा देकर ठग ने मोबाइल हैक कर खाते से 1 लाख 83 हजार 998 रूपए पार कर दिए। 13 मार्च को गोराबजार थाने में एफआईआर हुई।

केस 2
गोरखपुर निवासी मधुसूदन पांडे पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त है। जिनका मोबाइल गुम होने के बाद ठग ने शातिर तीरके से बैंक खाते में सेंध लगाई। 4.44 लाख रूपए पार कर दिए। 14 मार्च को एफआईआर दर्ज कराई गई।

केस 3
कजरवारा निवासी आरक्षक गौतम सिंह को ठग ने फोन कर स्वयं को विद्युत मंडल जबलपुर का कर्मचारी बताकर स्मार्ट मीटर अपडेट करने और रिफंड दिलाने के नाम पर मोबाइल हैक कर खाते से 1.5 लाख रूपए उड़ाए ।

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