आंगनबाड़ी मानदेय की लड़ाई को लेकर पीआईएल का रास्ता बंद हाईकोर्ट ने बताया आगे का कानूनी मार्ग, कहा उचित मंच का लें सहारा

जबलपुर। प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय, सेवा शर्तों तथा कर्मचारी दर्जे से जुड़ी बहुचर्चित लड़ाई को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी संकेत दिया है। अदालत ने साफ कर दिया कि सेवा संबंधी अधिकारों और आर्थिक दावों की लड़ाई जनहित याचिका के मंच से नहीं लड़ी जा सकती। इसके लिये उन्हें उचित मंच पर चुनौती देनी होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सीधी जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन की महासचिव विभा पाण्डेय द्वारा दायर याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि ऐसे विवाद व्यक्तिगत अथवा सेवा अधिकारों की श्रेणी में आते हैं। इसलिए इन पर पीआईएल के माध्यम से न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। हालांकि न्यायालय ने याचिकाकर्ता पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता खुला रखा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर सक्षम न्यायालय, सेवा मंच अथवा अन्य उपयुक्त कानूनी प्राधिकरण के समक्ष स्वतंत्र रूप से चुनौती प्रस्तुत कर सकती हैं।

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