
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना की स्थिति को लेकर राज्य शासन से विस्तृत जानकारी तलब की थी। मामले में आगे हुई सुनवाई दौरान सरकार की ओर से स्कूलों के भवन, सुविधाओं और संसाधनों संबंधी ब्यौरा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिसे रिकॉर्ड पर लेने के बाद सुनवाई पूरी करते हुए न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
दरअसल इस मामले की शुरुआत जबलपुर के करौंदी स्थित कैंट स्कूल की बदहाल स्थिति संबंधी जानकारी सामने आने से हुई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान बताया गया कि संबंधित स्कूल राज्य शासन के बजाय स्थानीय निकाय द्वारा संचालित है। इसके बाद हाईकोर्ट ने दायरा बढ़ाते हुए पूरे प्रदेश में राज्य सरकार तथा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और आधारभूत ढांचे की जानकारी मांगी थी। न्यायालय ने मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे। मामले में आगे हुई सुनवाई बाद न्यायालय ने सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
