विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन में सम्मिलित हुए डॉ रामानुज

सतना: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में विज्ञान भारती का 7वाँ द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 13 एवं 14 जून को आयोजित हुआ। जिसमें देशभर से आए 1200 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विज्ञानकर्मी और पदाधिकारी सम्मिलित हुए।इस अधिवेशन ने विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की भूमिका पर व्यापक विमर्श का मंच प्रदान किया।

अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन या तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि लोककल्याण होना चाहिए।उन्होंने कहा कि विश्व के वे देश सर्वाधिक प्रगति कर सके हैं जिन्होंने विज्ञान और समाज के हितों के बीच संतुलन स्थापित किया। उनके अनुसार विज्ञान तभी सार्थक है जब वह सामान्य जनजीवन को बेहतर बनाने, समाज की समस्याओं का समाधान करने और मानवता के कल्याण का माध्यम बने।
महाकोशल प्रांत से भी इस राष्ट्रीय अधिवेशन में 40 से अधिक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी सम्मिलित हुए। इनमें चित्रकूट से डॉ. सीताशरण गौतम, डॉ. रवि चौरे, सतना से डॉ. कमलेश चौरे,डॉ रामानुज पाठक,रीवा से डॉ ऋषि तिवारी,डॉ. रामनारायण तिवारी एवं डॉ. विनय दुबे तथा देवास से अमित कुंडल सहित अनेक प्रतिनिधियों ने सहभागिता दर्ज कराई। अधिवेशन का सबसे महत्वपूर्ण आयाम विकसित भारत के लिए भारत-केंद्रित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर पारित प्रस्ताव रहा।

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