खनन एजेंसियों को परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश

नयी दिल्ली, 25 मई (वार्ता) सरकार ने देश की खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खनन एजेंसियों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने और मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को बेंगलुरु में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मेकेनिक्स, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स और रिमोट सेंसिंग एंड एरियल सर्वे के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में कहा, “सभी संगठनों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लानी चाहिये और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और दक्षता प्रत्येक संस्थागत प्रक्रिया की नींव बनें। देश की जनता और सरकार इस क्षेत्र में कार्यरत प्रत्येक एजेंसी से गति, जवाबदेही और स्पष्ट परिणामों की अपेक्षा करती है।” बैठकों में खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और संस्थागत प्रयासों को ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप बनाने पर चर्चा की गयी।

मंत्री ने देशभर में चल रही परियोजनाओं, तकनीकी प्रगति और अन्वेषण गतिविधियों का आंकलन किया – विशेष रूप से रेअर अर्थ मेटल्स, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और प्लैटिनम समूह के तत्व जैसे महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में। उपस्थित संगठनों ने संसाधन वृद्धि, खनिज लक्ष्य निर्धारण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, खदान स्थिरता और उन्नत अन्वेषण प्रणालियों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। श्री रेड्डी ने कहा कि भारत आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनन और अन्वेषण क्षेत्र देश के भविष्य के विकास, औद्योगिक विस्तार और रणनीतिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी संगठनों को स्पष्ट समय सीमा, मापनीय परिणामों और अधिक जवाबदेही के साथ समन्वित मिशन-मोड में कार्य करने का निर्देश दिया। आधुनिकतम प्रौद्योगिकी अपनाने की सलाह देते हुए मंत्री ने कहा कि खनिज अन्वेषण का भविष्य एआई, रिमोट सेंसिंग, एकीकृत भू-विज्ञान विश्लेषण और उन्नत अन्वेषण पद्धतियों जैसी तकनीक-आधारित प्रणालियों में निहित है। हमारे संस्थानों को इस परिवर्तन का नेतृत्व करना चाहिये ताकि देश भविष्य के लिए तैयार और संसाधन के मामले में सुरक्षित बन सके।

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